रेडियोएक्टिव प्लेट, दुर्लभ पेंटिंग, मैजिकल चश्मा और करामाती सुलेमानी माला दिखाकर व्यापारियों से 26 करोड़ ठगने वालों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को नासा, DRDO, रक्षा मंत्रालय और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से जुड़ा बताते थे। फर्जी डॉक्यूमेंट दिखाते थे। बनीपार्क थाना पुलिस ने सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) से 7 फरवरी को इस अंतरराज्यीय गिरोह के विनय पोद्दार और विकास पोद्दार को पकड़ा। आरोपी साल 2019 से फरार चल रहे थे। इनके खिलाफ जयपुर सहित अन्य राज्यों में भी मामले दर्ज हैं। दोनों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित था। थाना प्रभारी मनोज कुमार बेरवाल के नेतृत्व में टीम ने आरोपियों को ट्रेस किया। इनके कुछ साथियों की पहले गिरफ्तारी हो चुकी है। बाकी फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। फर्जी कंपनियां बनाकर ऑफिस खोल रखे थे डीसीपी वेस्ट हनुमान प्रसाद ने बताया- गिरोह ने रेन्सल एनर्जी, Sipri, Rencel Elecken Fonvy, BMW Precious Metal Trade Linker जैसी फर्जी कंपनियां बना रखी थी। जयपुर, मुंबई और अन्य शहरों में ऑफिस खोलकर रेडियोएक्टिव प्लेट और दुर्लभ कलाकृतियों को ऊंचे दामों पर बेचने का लालच दिया जाता था। इस तथाकथित टेस्टिंग को बार-बार फेल बताकर जांच के नाम पर फिर से पैसे लिए जाते थे। इसके बाद भव्य ऑफिसों में लोगों को मैजिकल मिरर, चश्मा और सुलेमानी माला दिखाकर ठगी की जाती थी। गिरोह के कुछ सदस्य पहले गिरफ्तार गिरोह के अजीत सिंह, सत्यनारायण, गणेश इंगोले, अमित गुप्ता, राकेश गोयल, सन्नी जैन, चन्द्र सैन, आशीष गुप्ता, शिवानी गुप्ता और भवानी सिंह शेखावत को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। इनके खिलाफ जयपुर, हैदराबाद, कोलकाता, इंदौर और दिल्ली सहित विभिन्न शहरों में मामले दर्ज हैं। पुलिस ने गिरोह के सदस्यों के घर, ऑफिस और आगरा रोड व अजमेर रोड स्थित फार्म हाउस पर दबिश दी थी। ठिकानों से दुर्लभ पेंटिंग, मैजिकल चश्मे, सुलेमानी माला और धोखाधड़ी से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे। दर्ज प्रकरणों के आधार पर गिरोह ने करीब 26 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है। गिरोह के दर्जनों बैंक खातों की जानकारी मिली है। धोखाधड़ी से अर्जित राशि वाले खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


