हड्डी टूटने, एक्सीडेंट में फैक्चर, गंभीर चोट वाले और कैंसर के मरीजों को ऑपरेशन के लिए एक-दो दिन नहीं बल्कि 15 से 20 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार मरीजों को ऑपरेशन थियेटर ले जाने के बाद वापस लाया जा रहा है। इससे गंभीर मरीजों की जान जाने का खतरा भी बढ़ गया है। मरीजों के साथ मौजूद परिवारवालों का कहना है कि डॉक्टरों और स्टाफ वाले बिना कोई जानकारी दिए ओटी से वापस कर देते हैं। ऐसा एक-दो नहीं कई बार होता है। इसका विरोध करते हैं तो कहते हैं जाओ प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा लो। मजबूरी में लोग मरीजों के साथ अस्पताल में ही रहते हैं जब तक उनका इलाज न हो जाए। अंबेडकर अस्पताल में छोटी-बड़ी ओटी मिलाकर कुल 29 ऑपरेशन थिएटर हैं। सभी में सर्जरी के लिए केवल 1-2 डॉक्टर हैं। अस्पताल में रोजाना एक्सीडेंट, कैंसर और गंभीर बीमारी से पीड़ित दर्जनों मरीज आते हैं। कई मरीज तो ऐसे हैं जो एक महीने से ऑपरेशन का इंतजार कर रहे हैं। अस्पताल में रोज पांच से छह मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें ऑपरेशन थियेटर ले जाने के बाद वापस भेजा जा रहा है। मरीज दर्द से तड़पता रहता है लेकिन डॉक्टर एक नहीं सुनते। ऐसे मरीजों के साथ स्टाफ का बर्ताव भी अच्छा नहीं रहता। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के पास अपनी बारी आने का इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं होता है। कई बार तो मरीजों के परिजन अपना आपा खो देते हैं। डॉक्टरों और प्रबंधन से जमकर विवाद होता है। हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। केस -1 – अंबिकापुर से आए विनीत चौहान ने बताया कि उनकी नानी को मुंह का कैंसर है। पिछले 13 दिनों से कैंसर सर्जरी वार्ड में भर्ती हैं। उन्हें 3 बार ओटी तक ले गए और हर बार वापस भेज दिया। कहते हैं अभी नंबर नहीं आया। आश्वासन दे रहे सर्जरी हो जाएगी, लेकिन हुई नहीं। केस -2
राजधानी की इंदू वर्मा ने बताया कि कैंसर सर्जरी के लिए अंबेडकर अस्पताल आई थी। 20 दिन भर्ती रखा गया। 3 बार ओटी ले जाकर वापस ले आए। 21वें दिन सर्जरी की। अभी फॉलोअप के लिए आ रही हूं। ऑपरेशन को लेकर स्टाफ ने परेशान किया। केस -3
बलौदाबाजार से आए चेतन ने बताया कि वे अपने भाई को लेकर अस्पताल आए थे। उसका एक्सीडेंट हो गया था। पिकअप वाले ने जोरदार टक्कर मारी थी। भाई के पैर की हड्डी टूट गई थी। 10 दिन बाद ऑपरेशन हुआ। अभी भी अस्पताल में ही भर्ती है। न्यू ट्रॉमा ओटी को भी शुरू करने में लग गए पांच माह अंबेडकर अस्पताल के सेकंड फ्लोर में न्यू ट्रॉमा ओटी हाल ही में शुरू की गई। 5 नवंबर को यहां आग लग गई थी। इसकी चपेट में एसी, ओटी में रखे उपकरण और मशीनें चपेट में आ गईं। धुंआ पूरे ऑपरेशन थियेटर कांप्लेक्स में भर गया। घटना के वक्त ओटी के बगल में दूसरे ओटी में मरीज की सर्जरी चल रही थी। इस वजह से तुरंत ऑपरेशन रोकना पड़ा। लेकिन गलियारे में धुंआ भरने से मरीज के साथ डॉक्टर व नर्स भी फंस गए। उस घटना के बाद से ओटी का काम जारी था। जिसे अब शुरू किया गया है। कई साल से नहीं बढ़ा रहे ऑपरेशन थियेटर
अंबेडकर अस्पताल में मेजर और माइनर मिलाकर कुल 29 ओटी हैं। इनमें 6 मेजर, 1 आई, 1 ईएनटी, 1 गायनी, 2 सर्जरी और 1 आर्थो विभाग की है। इसके अलावा यहां कुछ माइनर और न्यू ट्रॉमा में ओटी है। जानकारी के अनुसार यहां पहले प्लास्टिक सर्जरी और न्यूरो की भी ओटी थी, लेकिन इसे डीकेएस ट्रांसफर कर दिया गया है। इसलिए यह दोनों ओटी भी अभी बंद है। कभी मेंटनेंस तो कभी मशीनों के खराब होने का हवाला देकर ओटी बंद कर दी जाती है। रोजाना मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन ओटी की संख्या कई साल से नहीं बढ़ाई गई है। न्यू ट्रॉमा ओटी को भी शुरू करने में लग गए पांच माह अंबेडकर अस्पताल के सेकंड फ्लोर में न्यू ट्रॉमा ओटी हाल ही में शुरू की गई। 5 नवंबर को यहां आग लग गई थी। इसकी चपेट में एसी, ओटी में रखे उपकरण और मशीनें चपेट में आ गईं। धुंआ पूरे ऑपरेशन थियेटर कांप्लेक्स में भर गया। घटना के वक्त ओटी के बगल में दूसरे ओटी में मरीज की सर्जरी चल रही थी। इस वजह से तुरंत ऑपरेशन रोकना पड़ा। लेकिन गलियारे में धुंआ भरने से मरीज के साथ डॉक्टर व नर्स भी फंस गए। उस घटना के बाद से ओटी का काम जारी था। जिसे अब शुरू किया गया है। एचओडी को दिए गए हैं सख्त निर्देश सभी विभागों के एचओडी से कहा गया है कि मरीजों की सर्जरी में कोई देरी न की जाए। शेड्यूल के अनुसार ही उन्हें ओटी में ले जाया जाए। ओटी से वापस भेजना ठीक नहीं है। गंभीर मरीजों का ऑपरेशन नहीं रोका जाता है।
-संतोष सोनकर, अधीक्षक अंबेडकर अस्पताल कोरोना: जिला अस्पताल में 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार
राजधानी में पहला कोरोना मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। रविवार को भी एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज में कोरोना के लक्षण दिखे हैं। उसे कोरोना है या नहीं अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. संतोष भंडारी ने बताया कि अस्पताल में कोविड मरीजों के लिए पर्याप्त बेड, मेडिकल स्टाफ और जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। अस्पतालों में कोविड टेस्टिंग किट रखे गए हैं। 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड भी तैयार कर लिया गया है। अंबेडकर अस्पताल में भी कोरोना के लिए 15 बेड के आईसीयू को रेडी किया जा रहा है।


