जालंधर में स्कैनिंग सेंटर की लापरवाही से टूटने पर घर:2026 की रिपोर्ट पर 2010 लिख लिंग निर्धारण का भी लगा गंभीर आरोप, जांच शुरू

जालंधर के कपूरथला चौक स्थित स्कैनिंग सेंटर की एक छोटी सी मिस्टेक ने एक गर्भवती महिला का घर टूटने की कगार पर ला दिया है। सेंटर ने साल 2026 की रिपोर्ट पर गलती से 2010 लिख दिया, जिससे विदेश में बैठे पति ने पत्नी पर शक करते हुए उसे अपनाने से इनकार कर दिया। मामला तब और गंभीर हो गया जब यह खुलासा हुआ कि सेंटर ने नियमों को ताक पर रखकर गर्भ में पल रहे बच्चों का लिंग भी बता दिया था। पीड़ित महिला ने हाल ही में कपूरथला चौक स्थित एक स्कैनिंग सेंटर से अपना अल्ट्रासाउंड करवाया था। यह अल्ट्रासाउंड महिला ने 2026 में कराया है,लेकिन सेंटर ने रिपोर्ट पर साल 2010 लिख दिया। जब महिला ने यह रिपोर्ट विदेश में रह रहे अपने पति को भेजी, तो वह भड़क गया। पति का तर्क था कि 16 साल पुरानी रिपोर्ट अब कैसे सामने आ रही है? उसने पत्नी को झूठा करार देते हुए खर्चा भेजना बंद कर दिया और तलाक की धमकी दे डाली। डॉक्टरों का संवेदनहीन रवैया महिला का आरोप है कि जब वह सुधरवाने के लिए सेंटर पहुंची, तो डॉक्टरों ने अपनी गलती मानने के बजाय उल्टा उसे ही प्रताड़ित किया। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने महिला पर ही पैसे देकर गलत रिपोर्ट बनवाने का आरोप लगाया और उसके पति को ‘अनपढ़’ कहकर बात टालने की कोशिश की। इस विवाद के कारण महिला के ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया है और वह फिलहाल अपनी मौसी के घर रहने को मजबूर है। लिंग निर्धारण का गंभीर आरोप इस मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। महिला का आरोप है कि स्कैनिंग सेंटर ने नियमों का उल्लंघन करते हुए उसे गर्भ में पल रहे बच्चों का लिंग (एक लड़का और एक लड़की) भी बता दिया था। भारत में PNDT एक्ट के तहत गर्भ में लिंग की जांच करना और बताना एक संगीन अपराध है। इस खुलासे के बाद स्कैनिंग सेंटर की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। कानूनी कार्रवाई की तैयारी सूचना मिलने के बाद शिव सेना समाजवादी के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और महिला को इंसाफ दिलाने का भरोसा दिया। संगठन ने घोषणा की है कि वे इस मामले की लिखित शिकायत सिविल सर्जन से करेंगे।
पीड़ित की मांग है कि इस सेंटर का लाइसेंस रद्द कर इसे तुरंत बंद किया जाए। हालांकि, विवाद बढ़ता देख सेंटर प्रबंधन ने बाद में गलती स्वीकार की और दोबारा स्कैन करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन पीड़ित परिवार अब कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग पर अड़ा हुआ है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *