जिनके आवेदन रिजेक्ट या लंबे समय से पेंडिंग हैं, उन्हें शिकार बना रहे

भास्कर : विभागीय वेबसाइट सेफ नहीं है, जानकारी आसानी से मिल रही, ऐसा क्यो? एलडब्ल्यूओ : यह राज्य स्तर का मामला है। भास्कर : क्या किसी आवेदक को फोन या व्हाट्सएप कर योजना में आवेदन स्वीकृति की जानकारी विभाग द्वारा दी जाती है? एलडब्ल्यूओ : किसी को फोन नहीं किया जाता। आवेदक के पास स्वीकृति पर अपनेआप ही मैसेज आ जाता है। भास्कर : जालोर में हुई ठगी के बाद अन्य आवेदकों को क्या सलाह देंगे? एसडब्ल्यूओ : आवेदन करते ही पर मैसेज जाता है कि किसी की बातों मेंं ना आएं। किसी को रुपए नहीं देवें। ऐसे फोन आने पर विभाग को सूचना दें या फिर साइबर पुलिस को सूचना दें। ठग ऐसे लोगों को शिकार नहीं बनाते जिनके आवेदन अप्रूव हो चुके हैं। जिन्हें आवेदन की योजना का लाभ मिल चुका है। वे उन्हें ही फोन करते हैं, जिनके आदेवन या तो अटके हैं या रिजेक्ट हो चुके हैं। ऐसे लोग झांसे में आ जाते हैं। हितेश चौधरी, लेबर वेलफेयर ऑफिसर रघुराज उपाध्याय | जालोर श्रम विभाग की वेबसाइट सुरक्षित नहीं है। यही कारण है कि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी की जा रही है। मजेदार बात यह है कि इस विभाग के मुखिया खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हैं। बता दें कि गुरुवार को चित्तौडगढ़ पुलिस ने 2 ठगों को पकड़ा। दोनों ने प्रदेश के 8 जिलों के 28 जनों को ठगा। दोनों ने श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं में स्वीकृत राशि देने के नाम पर ठगी की। आरोपी जोधपुर के तिंवरी निवासी दिलीप माली पहले ई-मित्र संचालित करता था। दूसरा आरोपी मनोहर सहयोगी था। दोनों श्रम विभाग की वेबसाइट से विभिन्न योजनाओं में लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन करने वाले लोगों का डेटा निकालना जानते थे। उन्होंने डेटा निकाला और कुल 28 लोगों से लाखों रुपए ठग लिए। वेबसाइट पर आसानी से उपलब्ध आवेदक की जानकारी श्रम विभाग: की वेबसाइट पर श्रमिक कार्ड बनाने वाले श्रमिकों सहित विभिन्न योजनाओं के लाभ के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों की जानकारी आसानी से उपलब्ध है। वेबसाइट पर डिस्ट्रिक्ट वाइज स्कीम व डिस्ट्रिक्ट वाइज रजिस्ट्रेशन टैब पर आवेदन की रजिस्ट्रेशन नंबर मिल जाता है। इस रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए आवेदक की जानकारी जन सूचना पोर्टल व ई-मित्र आईडी मिल जाती है। जहां आवेदन करने की तारीख, आवेदन का प्रकार, स्कीम आदि मिलते हैं। साथ ही ई-मित्र आईडी के माध्यम से आवेदक के मोबाइल नंबर, आधार व जनाधार नंबर तक निकाल सकते हैं। इन्ही जानकारी के जरिए ठग लोगों को फोन कर उन्हें भरोसे में लेते हैं। लोग आसानी से उनके झांसे में आ जाते हैं। केस 1 : जालोर में 2020 से एक महिला का एक्सीडेंटल क्लेम का आवेदन प्रोसेस में था। बाद में रिजेक्ट हो गया। ठग ने आवेदन में दिए महिला के बेटे के नंबर पर फोन कर कहा कि 1.70 लाख पास हो गए। चायपानी देना होगा। उनसे 50 हजार रुपए ठग लिए। केस 3 : ठग ने आवेदन में से महिला का फोटो भेजा, साथ ही आवेदन की जानकारी भेजी। आवेदन करने के बाद 4 साल से इंतजार कर रहे बेटे ने यकीन कर लिया और तुरंत लालच में आ ठग को 50 हजार 400 रुपए ट्रांसफर कर दिए। वेबसाइट से डेटा चुरा जालोर के 3 जनों से ठगे से 1. 42 लाख केस 2 : आहोर के एक व्यक्ति के 2017 के एक्सीडेंटल डेथ क्लेम के लिए उसके बेटे के पास फोन आया। कहा आपके 2 लाख रुपए पास हो गए। पेमेंट का फर्जी स्क्रीनशॉट भेजा तो लालच में आ गया और ठग को 42 हजार दे दिए।

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