बीकानेर जिले में जिप्सम की रॉयल्टी वसूली का नया ठेका एक अप्रैल से नहीं होगा। क्योंकि, ठेके की आरक्षित दर 33.52 करोड़ बढ़ाकर 1.06 अरब कर दी गई है जो इतनी ज्यादा है कि बोली लगना मुश्किल है। बीकानेर जिले में जिप्सम की रॉयल्टी वसूली का नया ठेका एक अप्रैल से होना है जिसके लिए निविदा जारी कर दी गई है। इस बार आरक्षित दर एक अरब 6 करोड़ 65 लाख 46 हजार 705 रुपए रखी गई है जो पिछली बार हुए रॉयल्टी ठेके की आरक्षित राशि से 33,52,37,845 रुपए ज्यादा है। आरक्षित दर इतनी ज्यादा बढ़ा दी गई है कि कोई भी फर्म बोली नहीं लगाएगी और बीकानेर में जिप्सम का रॉयल्टी ठेका नहीं होगा। पिछली बार भी खान विभाग ने शुरू में आरक्षित दर 111 करोड़ रुपए की थी और सात बार नो बिड रही। क्योंकि, किसी भी फर्म ने बोली ही नहीं लगाई। आखिरकार खान विभाग को आठवीं बार आरक्षित दर घटाकर करीब 73.13 करोड़ रुपए करनी पड़ी थी। तब जाकर 24 अक्टूबर, 24 को 75,01,48860 रुपए वार्षिक में दो साल के लिए रॉयल्टी ठेका हुआ था। इस बार फिर खान महकमे के अधिकारियों ने नियमों का हवाला देकर पुरानी गलती को दोहराया है। आरक्षित दर बेतहाशा बढ़ाकर एक अरब रुपए पार कर दी जिससे तय माना जा रहा है कि ठेका नहीं होगा। नियमों में लचीलापन लाकर व्यावहारिक रूप से तय हो आरक्षित दर :बलारा खान एवं भूविज्ञान के रिटायर्ड खनि अभियंता राजेन्द्र बलारा का कहना है कि बीकानेर जिले में जिप्सम की रॉयल्टी का ठेका होना मुश्किल है। आरक्षित दर इतनी ज्यादा है कि कोई भी व्यवसायी बोली नहीं लगाएगा। ऐसे हालत में खान निदेशालय को बार-बार बिड जारी करनी पड़ेगी और हर बार नियमानुसार 10 प्रतिशत आरक्षित राशि कम करनी होगी। इसमें तीन माह निकल जाएंगे और उसके बाद बारिश के मौसम में जिप्सम खनन-निर्गमन बहुत कम हो जाता है तो कोई ठेका क्यूं लेगा। पिछली बार की तरह सितंबर-अक्टूबर में रॉयल्टी ठेका होगा वो भी आरक्षित दर 70-80 करोड़ रुपए तक आने पर। इस दौरान रॉयल्टी वसूली खान विभाग को करनी होगी और अवैध खनन-निर्गमन रोकना होगा जो आसान नहीं। सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान होगा। इससे तो अच्छा है कि खान निदेशालय नियमों में लचीलापन लाएं और व्यावहारिक रूप से आरक्षित दरें तय करें जिससे कि रॉयल्टी ठेका जल्दी हो और सरकार को राजस्व नुकसान से बचाया जा सके।


