जिम ट्रेनर का काम बंद हुआ तो शुरू की ऑर्गेनिक-खेती:वॉट्सएप ग्रुप बनाकर सब्जी-दूध की होम डिलीवरी; 30 लोगों को दी जॉब

कोरोना काल में जिम ट्रेनर का काम बंद हुआ तो उसे ऑर्गेनिक खेती करने का आइडिया आया। ट्रेनर ने 25 बीघा जमीन खरीदी। गिर समेत कई नस्लों की 18 गायें खरीदी और आधुनिक तरीके से न केवल ऑर्गेनिक खेती की। ट्रेनर ने वॉट्सएप ग्रुप बनाकर उन लोगों को जोड़ा जो ऑर्गेनिक फल-सब्जी और दूध की डिमांड करते हैं। ऑर्गेनिक उत्पाद की होम डिलीवरी की। इस तरह ट्रेनर ने खुद को स्थापित किया और 30 लोगों को जॉब भी दिया। सिरोही के ब्रह्मपुरी इलाके में रहने वाले विजय त्रिवेदी (45) ये ट्रेनर हैं। उनका कहना है कि कोरोना काल में जब सब कुछ बंद हो गया तब समझ आया कि शरीर बाहर से ज्यादा अंदर से मजबूत होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि हम शुद्ध आहार लें। ऑर्गेनिक खेती करने के लिए विजय ने ट्रेनिंग भी ली। इसके बाद ग्रीन नेट, शेड नेट, पॉली हाउस और तमाम आधुनिक साधनों का इस्तेमाल करते हुए सब्जियों व फलों की खेती शुरू की। गायों के गोबर और गोमूत्र से खाद तैयार की। म्हारा देस की खेती में इस बार बात सिरोही के युवा किसान विजय त्रिवेदी की… किसान विजय ने बताया- मुझे बचपन से ही फिटनेस को लेकर पैशन था। इसके लिए 2018 में मैंने सिरोही शहर में फिटनेस सेंटर खोला था। कोरोन में जिम बंद हो गई। इसके बाद खेती और पशुपालन का विचार आया। मैं ऑर्गेनिक खेती करना चाहता था। गाय आधारित खेती करने का विचार पक्का हो गया। साल 2022 में मैंने सिरोही में ही 25 बीघा खेत खरीदा। इसके बाद सिरोही कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों और समृद्ध किसानों से मिलकर ऑर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग ली। इसके बाद मैंने गिर समेत अलग-अलग नस्ल की 18 गायें खरीदीं। ऑर्गेनिक खेती के लिए गाय का गोबर सर्वश्रेष्ठ होता है। इस तरह 2023 में गायों से दूध का और 2024 में ऑर्गेनिक फल-सब्जी का कारोबार शुरू किया। ऑर्गेनिक फल-सब्जी, दूध की होम डिलीवरी का प्लान विजय ने बताया- मैं लोगों को हमेशा से सेहत के टिप्स देता था। मैंने ऑर्गेनिक सब्जियों के फायदे समझाना शुरू किया और वॉट्सएप ग्रुप बनाकर उन लोगों को जोड़ा जो ऑर्गेनिक अनाज, फल सब्जी खरीदना चाहते थे। इस ग्रुप में धीरे-धीरे 100 से ज्यादा परिवार जुड़ गए। इसके बाद 10 लोगों को काम पर रखा। इनका काम खेत से सब्जियां-फल तोड़कर पैकिंग कर डिमांड के आधार पर होम डिलीवरी करने लगे। इसी तरह दूध की भी होम डिलीवरी कर रहे हैं। हम कांच की बोतल में ताजा दूध डालकर सील पैक कर लोगों तक पहुंचा रहे हैं। एल्युमीनियम, स्टील, प्लास्टिक की बोतल में दूध खराब हो जाता है। कांच की बोतल में शुद्ध रहता है। दूध 70 से 80 रुपए प्रति लीटर बेच रहे हैं। गोबर के उपले ऑनलाइन बेचे, खाद यूनिट लगाई विजय ने बताया- गाय के गोबर से भी कई तरह के फायदे हो रहे हैं। मैंने गाय के गोबर के कंडे (उपले) ऑनलाइन बेचे। इसके बाद अब पूरा गोबर अलग-अलग तरह की खाद बनाने के काम आ रहा है। सभी गायों का नामकरण किया है। गायों से रोजाना 300 किलो गोबर मिलता है। इस गोबर को खाद बनाने के लिए अलग-अलग खाद यूनिट बना रखी हैं। खेती-पशुपालन मिलाकर 30 लोग रोजगार से जुड़े हैं। दस लोग गायें संभाल रहे हैं। बाकी 20 सब्जियों की पैदावार करने, तुड़ाई, पैकिंग और होम डिलीवरी करते हैं। नई तकनीक का इस्तेमाल किया बैक्टीरिया खाद की बेड: इसके लिए ग्रीन नेट में पक्की नालियां बनाकर उनमें गाय का गोबर और गोमूत्र डाला। इस पर जीवामृत, वेस्ट डीकंपोजर, ट्राइकोडर्मा और ओर्गेनिक बैक्टीरिया को बिछाया। ऊपर से ताजा गोबर छाछ मिलाकर डाला। यह खाद 80 दिन में तैयार होती है। एनोरोबिक बैक्टीरिया टैंक: इस टैंक में गुड़, गोबर, छाछ, बेसन, चावल की मांड, मोरिंगा का पत्ते और पानी मिलाकर नर्सरी का वेस्ट डालते हैं। इस टैंक से रस ट्‌यूब के जरिए अलग टैंक में इकट्‌ठा होता रहता है। 60 दिन बाद यह उपयोग में लाने लायक हो जाता है। दूर्वा घास नाइट्रोजन स्प्रे: इसके लिए 200 लीटर की यूनिट लगा रखी है। यह यूरिया का का काम करता है। इसके लिए घास काटकर टंकी में डाली जाती है। इसमें पानी भरा जाता है। इससे पानी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। इस पानी का खेत में स्प्रे करते हैं। इस पानी में हर तरह के मिनरल्स इकट्‌ठे हो जाते हैं। पानी साफ रहे इसका भी उपाय पानी को फिल्टर करने के लिए वेंचुरी मशीन फिल्टर लगा रखा है। इससे खेत तक फ्लोराइड नहीं पहुंचता। फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से बचाने के लिए स्ट्रीक पेपर लगा रखे हैं। नीले और पीले कार्ड पर कीट पतंगे आकर चिपक जाते हैं। इससे इन कीटों की संख्या नहीं बढ़ती। …. खेती-किसानी से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…. पाली के आलू से अमेरिका की कंपनी बना रही चिप्स:पिता बिजनेसमैन बनाना चाहते थे, युवक ने खेती को चुना; तीन महीने में ही लाखों कमाए पाली के 27 साल के प्रियांक सुराणा के पिता चाहते थे कि बेटा बिजनेसमैन बने, लेकिन बेटे ने यह सपना छोड़ खेती का रुख किया। प्रियांक ने आलू की खेती की। 80 हजार KG आलू का उत्पादन लिया। बेहतर क्वालिटी के कारण चिप्स बनाने वाली बड़ी कंपनी ने उनसे संपर्क किया। अब उनके खेत में पैदा हुए आलू से अमेरिका की कंपनी चिप्स बन रही है। (पढ़ें पूरी खबर)

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