करौली जिला अस्पताल में बरसों पुरानी एक्स-रे मशीन आमजन के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। एक्स-रे मशीन के आए दिन खराब रहने से रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मशीन के खराब रहने से जहां रोगियों की जेब पर वजन पड़ता है। वहीं, इलाज में भी देरी की आशंका रहती है। अस्पताल प्रशासन द्वारा भी सीमित मात्रा में पोर्टेबल मशीन से एक्स-रे करके काम चलाया जा रहा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने जल्द से जल्द खराब मशीनों को ठीक करने का आश्वासन दिया है। साथ ही दो नई मशीनों के लिए भी प्रस्ताव भेजने की बात कही है। जिला अस्पताल में दो एक्स-रे मशीन स्थापित है। एक मशीन 2003 से काम कर रही है। जिसकी क्षमता 300 एमए की है। जबकि दूसरी मशीन 2007 में स्थापित हुई है। इसकी क्षमता भी 500 एमए की है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 150 से अधिक रोगियों के एक्स रे होते हैं। जिले का सबसे बड़ा अस्पताल होने के कारण आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में रोगी करौली उपचार कराने पहुंचते हैं। जिसके चलते अस्पताल में रोगियों की संख्या भी अधिक है, लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मशीन खराब होने के कारण रोगियों को एक्स-रे बाहर से कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस के कारण समय और पैसे की बरबादी होती है। हालांकि पुरानी एक्स-रे मशीनों को बदलने के लिए समय-समय पर कार्मिकों द्वारा पत्र लिखकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक नई मशीन स्थापित नहीं होने से बार-बार खराब हो रही मशीन से काम चलाना पड़ रहा है। करौली हॉस्पिटल पीएमओ डॉक्टर रामकेश मीणा ने बताया कि लगातार खराब हो रही मशीनों को ठीक कराया जा रहा है, लेकिन अधिक लोड के कारण बार-बार मशीन खराब होती है। उन्होंने बताया कि नई मशीन के लिए भी कलेक्टर और राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजे हैं। साथ ही पुरानी मशीनों को भी दुरुस्त करने के लिए तकनीशियन काम कर रहा है।


