जिला हॉस्पिटल में 8-महीनों से कर्मचारियों को नहीं मिली सैलरी:प्रताड़ित करने का आरोप लगाया; ठेकेदार बोला- मिलते ही कर देंगे भुगतान

चित्तौड़गढ़ के जिला हॉस्पिटल में सोमवार को सिक्योरिटी गार्ड और अन्य संविदाकर्मियों ने वेतन नहीं मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले आठ महीनों से सैलरी नहीं मिली है, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने ठेकेदारों पर मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि वे लंबे समय से हॉस्पिटल में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर मेहनताना नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों ने बताया कि वे सभी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और घर का खर्च चलाने के लिए यही नौकरी उनका एकमात्र सहारा है। 8- 10 साल से काम कर रहे, फिर भी सैलरी रोकी महिला गार्ड ताहिरा खान ने बताया कि कई संविदाकर्मी पिछले 8 से 10 सालों से हॉस्पिटल में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए पूरी ड्यूटी करते हैं। गार्ड की तय सैलरी 6,420 रुपए और ट्रॉलीमैन का 5,800 रुपए है। इतनी कम सैलरी में भी वे किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कभी काम में लापरवाही नहीं की और हॉस्पिटल प्रशासन को शिकायत का कोई मौका नहीं दिया। इसके बावजूद उन्हें महीनों से वेतन नहीं मिलना उनके लिए बहुत बड़ी परेशानी बन गया है। पुराने ठेकेदार पर 6 माह का वेतन रोकने का आरोप कर्मचारियों ने बताया कि पहले वे मदरलैंड कंपनी के ठेकेदार अरविंद मीणा के अधीन काम करते थे। करीब दो महीने पहले उनका ठेका खत्म हो गया और वे यहां से चले गए, लेकिन उनके कार्यकाल के छह महीने का वेतन अब तक नहीं दिया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि ठेका समाप्त होते ही ठेकेदार अचानक चले गए और बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद रिलायंस सिक्योरिटी कंपनी की ओर से प्रीतम पंचोली ने ठेका संभाला। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले दो महीनों से उनके अधीन काम कर रहे हैं, लेकिन इस अवधि का वेतन भी अभी तक नहीं मिला है। इस तरह कुल मिलाकर आठ महीनों से वेतन अटका हुआ है। आर्थिक तंगी से टूटते परिवार, ठेकेदार ने दिया आश्वासन प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने कहा कि लगातार सैलरी नहीं मिलने उनके परिवारों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। कई कर्मचारी घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा का खर्च उठाने में असमर्थ हो चुके हैं। उनका कहना है कि जानबूझकर सैलरी रोका जा रही है, जिससे वे मानसिक रूप से भी परेशान हैं। हालांकि ठेकेदार प्रीतम पंचोली ने बताया कि यह समस्या पहले से चली आ रही है और बिल जमा कर दिए गए हैं। उनका ठेका केवल दो महीने से चल रहा है और दिसंबर महीने तक भुगतान मिलने की उम्मीद है। कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही बकाया राशि का समाधान किया जाएगा, लेकिन फिलहाल वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों में नाराजगी बनी हुई है।

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