भास्कर न्यूज|गिरिडीह जहां के िलए लीज िमली है, वहां से 300 मीटर दूर पहाड़ी को पत्थर कारोबारी तोड़ रहे हैं। मामला जिले के तिसरी प्रखंड के उपरैली कन्हाई गांव का है। यहां बाबा बैजनाथ स्टोन वर्क्स को 2.023 एकड़ जमीन पर पत्थर खनन का लीज पट्टा है। लेकिन, िजस जमीन को लीज में िलया है, वहां पत्थर के बजाय िमट्टी और समतल मैदान है। ऐसे में कारोबारी लीज की आड़ में निर्धारित स्थल से करीब 300 मी दूर वनभूमि पर अवस्थित पहाड़ तोड़कर पत्थर निकाल रहा है। इसकी जानकारी खनन िवभाग, वन िवभाग सहित स्थानीय अंचल कार्यालय को भी स्थानीय ने लोगों ने दी है। यहां धड़ल्ले से हर दिन जेसीबी और पोकलेन से पत्थरों का खनन िकया जा रहा है। करीब 35 हाइवा बोल्डर हर िदन यहां से कोडरमा जिले के डोमचांच स्थित क्रशरों में आपूर्ति की जा रही है। इससे जंगल और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंच रहा है। यह काम पिछले चार वर्षों से उपरैली कन्हई के जंगल में बेखौफ तरीके से चल रहा है, लेकिन वन विभाग और खनन विभाग ने इसे रोकने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इस वजह से एक पहाड़ी को पूरी तरह से काटकर अंदर जाने का रास्ता तैयार कर दिया गया है। खनन ऐसे स्थानों में हो रहा है, जहां आम लोगों की नजर आसानी से नहीं पहुंचती, इसलिए रात-दिन पत्थर की खुदाई जारी रहती है। क्षेत्र में काला पत्थर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिस कारण कारोबारी आसानी से पत्थर निकालकर कारोबार चला रहे हैं। पांच वर्ष पूर्व तक कन्हई गांव जंगल और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह इलाका पत्थर खोदने वाली मशीनों की आवाज से भर गया है। वहीं, उपरैली कन्हई से जमडार जाने वाली सड़क भी हाइवा के आवागमन के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पत्थर कारोबारियों ने कन्हई की प्राकृतिक सुंदरता को लगभग समाप्त करने में लगे हुए हैं। उसी माईंस में जाने के लिए बना हुआ रास्ता। केस स्टडी – 1: कन्हई में भारी ड्रिल मशीन से खनन कन्हई गांव में पत्थर कारोबारी को लगभग 3 एकड़ में खनन की लीज मिली है। पत्थर माइंस में भारी ड्रिल मशीन का उपयोग कर पत्थर निकाला जा रहा है और पास में उसी कंपनी के क्रशर में स्टोन चिप्स बनाकर बिहार भेजा जा रहा है। इससे आसपास लगातार पत्थर की धूल उड़ती रहती है। माइंस से मात्र 200 मीटर की दूरी पर कन्हई का आदिवासी टोला स्थित है, जहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। खनन विभाग ने भारी ड्रिल मशीन के उपयोग की अनुमति कैसे दी, यह जांच का विषय है। एयर क्वालिटी जांच मशीन भी बंद : साथ ही क्रशर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाई गई एयर क्वालिटी जांच मशीन भी बंद पड़ी है, जिससे जांच में गड़बड़ी हो सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी नियमों की अनदेखी कर खनन कर रही है। केस स्टडी – 2- बंद पड़े स्कूल भवन पर पत्थर कारोबारियों का कब्जा, अपने उपयोग का समान रखा उपरैली कन्हई में बंद पड़े एक सरकारी विद्यालय के भवन पर भी पत्थर कारोबारियों ने कब्जा जमा लिया है। गांव के रहने वाले स्थानीय एक व्यक्ति को अपने समर्थन में लेकर माफिया स्कूल के हर भवनों में अपने उपयोग का समान रखे हुए है। वहीं, स्कूल परिसर में ही ड्रील मशीनों को रखा जा रहा है। बताया जाता है कि वर्ष 2016 में सरकारी स्कूलों के मर्रज कर दिया गया था, उसके बाद से स्कूल बंद पड़ा हुआ है। ऐसे में अब इस स्कूल भवन का स्थानीय लोग उपयोग करने लगे थे, लेकिन जब से इलाके मंे माइंस खुली हैं और उसमें काफी लोग आकर रह रहे है। ऐसे में बंद स्कूल भवन को पत्थर कारोबारियों के लोग स्थायी ठिकाना बना लिए हैं, जिस पर विभाग की नजर भी नहीं है।


