{ये पुलिस थाने-चौकी पड़ते हैं रास्ते में… सागरपाड़ा पुलिस चौकी, सिटी कोतवाली धौलपुर, हाउसिंग बोर्ड पुलिस चौकी, सिटी कोतवाली, बिजौली पुलिस चौकी, बाड़ी सदर थाना, सरमथुरा पुलिस थाना, आंगई पुलिस थाना और बाड़ी सदर पुलिस थाना। {लापरवाही के 25 चालान, फिर भी दौड़ रही बस… भास्कर ने बस की डिटेल खंगाली तो सामने आया कि 2019 से 2024 तक बस संख्या UP 83 BT 1737 पर 25 चालान हो चुके थे। इनमें से एक पेंडिंग था। पिछले साल ही 5 चालान तो बिना परमिट या परमिट वॉयलेशन के हुए थे। ^ जांच कमेटी का मतलब होता है कि समिति सदस्य एकमत हों। सही फैक्ट्स को दिखाया ही नहीं और एनएचएआई को दोषी ठहरा दिया। – बलवीर यादव, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई दौसा ^ जहां हादसा हुआ, वो जगह पहले से ब्लैक स्पॉट है। एनएचएआई दौसा को हादसे से पहले भी ठीक करने को कहा , लेकिन ठीक नहीं किए। वो कहते हैं, उनकी जिम्मेदारी नहीं है, तो बता दें कि किसकी जिम्मेदारी है। – श्रीनिधि बीटी, जिला कलेक्टर, धौलपुर {इन आरटीओ चैक पोस्ट ने भी नहीं रोका…. सागरीपाड़ा चैकिंग पाइंट पर इंस्पेक्टर धीरसिंह मीणा, जितेंद्र मीणा, प्रभात रंजन शर्मा थे। इसके अलावा धौलपुर की 188 नंबर फ्लाइंग में सूरजभान सिंह, महेंद्र मीणा और मानवेंद्र सिंह परिवहन निरीक्षक थे। मनोज कुमार, गिरीश गंगवाल और धर्मपाल गुर्जर परिवहन निरीक्षक तैनात थे। प्रदीप कुमार शर्मा | धौलपुर दो माह पहले 19 अक्टूबर को धौलपुर में हुए बस और ऑटो टक्कर के हादसे में 12 जिंदगियां खत्म हो गईं। मरने वालों में 8 बच्चे थे। हादसे की जांच हुई तो कमेटी में शामिल अफसरों ने एक दूसरे के विभाग पर कमियां थोप दीं और विवाद इतना बढ़ा कि एनएचएआई के प्रतिनिधि ने तो जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से ही मना कर दिया। जबकि, हकीकत ये है कि जिस बस ने 12 जिंदगियों को कुचला, उस पर 6 साल में 25 चालान हो चुके थे, जिनमें से एक पेंडिंग भी चल रहा था। इसके बावजूद बस 6 पुलिस थाना-चौकी और 5 आरटीओ चेक पोस्ट से निकल गई। इसका जिक्र भी जांच रिपोर्ट में है। हादसे में बस चालक सहित ऑटो में बैठे 11 यात्रियों की मौत हो गई। अगले दिन परिवहन विभाग के प्रमुख शासन सचिव के निर्देश पर जांच कमेटी का गठन हुआ । कमेटी में एडीएम, आरटीओ, एडिशनल एसपी, एनएचएआई अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी थे। घटना के अगले दिन हाइवे पर गोबर का ढेर और बिल्डिंग मैटेरियल के पड़े होने की बात रिपोर्ट में कही गई। एनएचएआई की गलती {जिला कलेक्टर के पत्र में उल्लेख है कि 9 मई को सड़क सुरक्षा टास्क फोर्स की बैठक में सुनीपुर को ब्लैक स्पॉट मानते एनएचएआई को निवारण को कहा गया। {आईरैड की रिपोर्ट में हादसे का कारण रोड साइनेज का नहीं होना और निर्माण सामग्री का पड़ा होना बताया गया। {दुर्घटना विवरण की अंतिम लाइन में लिखा है कि संभावित कारणों में सड़क पर पड़ी निर्माण सामग्री या गोबर के ढेर भी हो सकते हैं।


