भास्कर न्यूज | थान खम्हरिया पिछले वर्ष सितंबर में केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी दरों में कटौती के बाद देशभर में जीएसटी उत्सव मनाया गया था। उस समय कई कंपनियों ने कीमतों में कमी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया। लेकिन महज कुछ महीनों में ही राहत का असर खत्म होता दिख रहा है। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे आम उपभोक्ता का बजट बिगड़ने लगा है। फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स के तहत आने वाले खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ, सौंदर्य प्रसाधन, स्वच्छता एवं घरेलू सफाई उत्पाद, व्यक्तिगत देखभाल सामग्री, शैंपू, टूथपेस्ट, हेयर ऑयल, कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, नूडल्स सहित दैनिक उपयोग की कई वस्तुओं के खुदरा मूल्य बढ़ गए हैं। शादी सीजन में खाद्य तेल की कीमत प्रति टीन 2400 रुपए के पार पहुंच गई है। मसालों के दाम भी लगातार ऊपर जा रहे हैं। जिससे उपभोक्ताओं को दोहरी मार भी झेलनी पड़ रही है। पहले 900 ग्राम में मिलने वाला खाद्य तेल अब 700 ग्राम पैक में उपलब्ध है, लेकिन कीमत लगभग समान है। इसी तरह कई उत्पादों के पैकेट साइज घटाकर बाजार में उतारे जा रहे हैं। पिछले तीन महीनों में बढ़ी हुई दरों के साथ चुनिंदा पैकेट दुकानों में पहुंच रहे हैं। असर ऐसा उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रही राहत जीएसटी दर में कटौती के बाद इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल और ऑटो सेक्टर में भी कीमतों में गिरावट देखी गई थी, लेकिन अब धीरे-धीरे इन उत्पादों के दामों में भी वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं। जीएसटी कटौती के बाद बड़ी कंपनियों ने नियामकीय जांच के डर से आवश्यक वस्तुओं में तत्काल कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत दी थी। लेकिन अब कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और रुपए में गिरावट का हवाला देते हुए उत्पादों की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। आरोप है कि जिले में आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी वजह है।


