जवाहर कला केंद्र में पाक्षिक नाट्य योजना के अंतर्गत पहले दिन बुधवार को नाटक ‘नज़ीरनामा’ का मंचन हुआ। नाटक का लेखन व निर्देशन बिशना चौहान ने किया है और इस प्रस्तुति के माध्यम से इतिहास प्रसिद्ध शायर नजीर अकबराबादी के जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला गया। नजीर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखी और समाज की हर छोटी-बड़ी खूबी को कविताओं में तब्दील कर दिया। इसी कड़ी में योजना के दूसरे दिन 24 अप्रैल को विजय, कमलेश एवं कल्पना के निर्देशन में नाटक ‘नेक चोर’ का मंचन होगा। रंगायन में हुए नाटक में प्रसिद्ध कवि नजीर की मानवीय सोच और समाज के प्रति समर्पण को दर्शाया गया। यह प्रस्तुति उस दौर की कहानी कहती है जब उनके क्षेत्र में अकाल और संकट छा गया था। लोग भूख से बेहाल थे और अपनी भेड़-बकरियां तक बेचने को मजबूर थे। इस कठिन समय में नजीर न केवल अपने लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए आगे आते हैं। जब उनकी पत्नी बची हुई एक जोड़ी पायल बेचने की बात करती हैं, तो नजीर उसे समाज के कल्याण हेतु एक चादर पर रख देते हैं और लोगों से दान की अपील करते हैं। यह देखकर वहां मौजूद बाई साहिब भी अपने सारे जेवर निकालकर वहां रख देती हैं। दर्शकों का ध्यान खींचता है वो दृश्य जब वहां खड़ी छोटी बच्ची अपने हाथ की एक रोटी भी वहां लाकर रख देती है जिससे सेठ साहूकारों का ह्रदय परिवर्तन होता है और वह कहते हैं ‘अब हमारे दिलों की तरह हमारे गोदामों के दरवाजे भी आपके लिए खुले हैं।’ नाटक की निर्देशिका बिशना चौहान ने इस प्रस्तुति पर कहा कि “न हिंदू बन, न मुसलमान बन, न मुल्ला बन, न पंडा बन, जिस जात पर मर मिटे खुदा, ऐ आदम तू वो इंसान बन।” नाटक में नजीर के किस्से कहानियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए 24 कलाकारों ने मंच पर अभिनय किया। प्रमुख भूमिकाओं में नजीर – संदीप शर्मा रहे व इनके अलावा निर्मल तिवारी, रूपेश, गुंजन, शगुन, मिष्ठी, खुशबू, प्रीति, शांतनु, गौरव, प्रवीण, नितेश, मिलन और अक्षत ने अभिनय किया। तकनीकी टीम में लाइटिंग संभाली राम बाबू ने, संगीत दिया श्रुति धर्मेश ने, सेट डिजाइन किया दिनेश नायर ने, कॉस्ट्यूम गौरव का रहा। असिस्टेंट डायरेक्टर रहे निर्मल तिवारी।


