जीवन की अंतिम घड़ी का बोध ही जगाता है भक्ति: आचार्य बालकृष्ण

रणजीत एवेन्यू बी-ब्लॉक स्थित बाबा दीप सिंह पार्क में श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन भक्तिभाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य बालकृष्ण ठाकुर महाराज ने श्रद्धालुओं को राजा परीक्षित और श्री शुकदेव जी महाराज के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार राजा परीक्षित ने शुक्रताल की पावन भूमि पर सात दिनों तक श्रीमद् भागवत का श्रवण कर जीवन का परम ज्ञान प्राप्त किया। आचार्य श्री ने कहा कि जब मनुष्य जीवन की अंतिम घड़ी को समझ लेता है, तभी उसके भीतर सच्चे वैराग्य और भक्ति का भाव जागृत होता है। राजा परीक्षित ने मृत्यु का शाप मिलने के बाद संसारिक मोह त्यागकर केवल भगवान की कथा का आश्रय लिया और श्री शुकदेव जी महाराज के श्रीमुख से भागवत ज्ञान प्राप्त कर मोक्ष मार्ग को अपनाया। संध्याकालीन सत्र में श्री लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की मनोहारी कथा का वर्णन किया गया। जैसे ही नंद बाबा के आंगन में कान्हा के जन्म का प्रसंग आया, पंडाल ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। भजनों की मधुर धुन पर महिला-पुरुष, युवा और बच्चे सभी भाव-विभोर होकर नृत्य करते नजर आए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रानी के बाग महाजन सभा के प्रधान गुलशन महाजन विशेष रूप से उपस्थित रहे। आयोजकों द्वारा उनका स्वागत-सम्मान किया गया तथा उन्हें भी जन्मोत्सव की बधाई दी गई। श्रद्धालुओं ने कहा कि कथा श्रवण से मन को शांति और आत्मा को सुकून प्राप्त होता है। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में भी कथा का प्रवाह इसी प्रकार जारी रहेगा और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की।

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