भास्कर संवाददाता| डूंगरपुर शहर में चल रही ऋषभ कथा के पांचवे दिन ऋषभ कथा में भगवान ऋषभदेव के वैराग्य जीवन को लेकर गुरुदेव ने संबोधित किया। उससे पहले शनिवार को रात को भगवान की शादी की बारात निकाली लोगों ने बारात में जमकर नाच गाना किया और बारात का धूमधड़ाके के साथ स्वागत किया उसके उपरान्त भगवान का पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न हुआ जिसमे भी लोगों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और खूब आनंद उठाया जैसे मानों भगवान की वास्तविक शादी हो रही हो। पांचवे दिन भारत गौरव और राष्ट्रीय संत आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा कि भगवान पंकज है, नीरज है क्योंकि कमल का फूल कीचड़ में उग कर उससे बाहर आकर खिलता है वैसे ही भगवान भी गृहस्थ जीवन काटते हुए उससे काफी दूर थे क्योंकि उन्हें ये संसार मिथ्या लगता, कीचड़ जैसा लगता था। उन्होंने कहा कि भगवान अपना राजपाठ छोड़कर निकल पड़े और वन में चले गए वहां उन्होंने अपने केश हाथों से खींचे क्योंकि शरीर की शोभा बालो से ही होती है इसलिए उन्होंने वस्त्रों के साथ बालो को खींचकर निकाल दिए। गुरुदेव ने कहा कि ये संसार मिथ्या है, जिसने जन्म लिया उसकी मृत्यु निश्चित है इसलिए जीवन में भक्ति का मार्ग अपनाते हुए कर्म करो ईश्वर अपनी शरण में स्थान प्रदान करेंगे। मंगलाचरण की प्रस्तुति के बाद पाद पक्षालन किया गया। कार्यक्रम में समस्त सकल जैन समाज के धर्मावलंबी उपस्थित रहे। प्रतिष्ठाचार्य अरविन्द जैन ने बताया कि सोमवार को भगवान परम ज्ञान को निकल पड़ेंगे उस पर कथा की जाएगी।


