जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर और जूनियर एनवायरमेंट इंजीनियर का परिणाम फिर से जारी होगा। हाई कोर्ट ने इसे लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) और इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन (आईबीपीएस) को निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने नरपत सुरेला, महेन्द्र जाखड़ सहित अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि आरएसपीसीबी और आईबीपीएस दो माह में हाई कोर्ट के मानको औऱ कानून के तहत भर्ती प्रक्रिया को पूरा करे। अन्यथा अदालत पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर देगी। ना आंसर-की जारी ना ही आपत्तियां मांगी
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता राम प्रताप सैनी व अन्य ने बताया कि आईबीपीएस ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व अन्य विभागों के विभिन्न पदों के लिए 5 अक्टूबर 2023 को विज्ञप्ति जारी की। भर्तियों के लिए 9 जनवरी 2024 को ऑनलाइन एग्जाम लिया गया। वहीं 22 फऱवरी से 24 फरवरी के बीच चयनित अभ्यर्थियों की प्रोविजनल लिस्ट डॉक्यूमेट वैरिफिकेशन के लिए जारी कर दी। चयन से वंचित रहने वाले याचिकाकर्ताओं ने यह कहते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी कि उन्हें एग्जाम के बाद प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट नहीं दी गई। इसके साथ ही एजेंसी ने कोई आंसर-की भी जारी नहीं की। पूरी भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई है। वहीं पारदर्शिता भी नहीं रखी गई। दो महीने में प्रोसेस फोलो करते हुए परिणाम जारी करो
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भर्ती एजेंसी अगले दो माह में पूरे प्रोसेस को फोलो करते हुए फिर से इन दोनों परीक्षाओं का परिणाम जारी करे। हाई कोर्ट ने कहा कि एजेंसी आसंर-की जारी करे, उसके बाद अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगे। उन आपत्तियों को एक्सपर्ट कमेटी से निस्तारित करवाए। उसके बाद फाइनल आंसर-की जारी करते हुए चयनित अभ्यर्थियों की लिस्ट जारी करे। इस चयन प्रक्रिया में अगर याचिकाकर्ता चयनित होते है तो उन्हें नियुक्ति दे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जो अभ्यर्थी पहले चयनित हो गए है। अगर वो चयन प्रक्रिया से बाहर होते है तो उनसे किसी तरह की रिकवरी नहीं होगी। वहीं जब तक पुन परिणाम जारी करके भर्ती प्रक्रिया को पूरा नहीं कर लिया जाता है तब तक चयनित अभ्यर्थियों को नियमित नहीं किया जाएगा।


