960 करोड़ के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई से प्रदेशभर में हड़कंप मच गया। घोटाले में शामिल जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी)के चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल को उदयपुर से गिरफ्तार किया गया। वे कोड़ियात स्थित ताज अरावली होटल के सुइट में ठहरे हुए थे। नाम न छापने की शर्त पर एक अफसर ने बताया कि चीफ इंजीनियर गोयल सोमवार को उदयपुर आए थे। उनके पास उदयपुर पीएचईडी के चीफ इंजीनियर का अतिरिक्त चार्ज भी है। मंगलवार को उन्हें विभाग में बैठक करनी थी। सोमवार रात से वह होटल के सुइट रूम में पार्टी कर रहे थे। उनके जयपुर से आने-जाने, फाइव स्टार होटल में रुकने, खाने-पीने और गाड़ी की व्यवस्था ठेकेदार ने करवाई थी। जयपुर से उदयपुर एसीबी टीम को गोयल के शहर में होने की सूचना मिली। एएसपी अनंत कुमार ने टीम के साथ सुबह 4 बजे होटल पर दबिश देकर गोयल को गिरफ्तार किया। फिर टीम के साथ जयपुर ले गए और जयपुर एसीबी को सौंप दिया। 8 आरोपी और पकड़े मामले में उदयपुर के अलावा जयपुर, बाड़मेर, करौली, दिल्ली व अन्य राज्यों में भी कार्रवाई हुई। इस दौरान एसीबी ने मुख्य अभियंता ग्रामीण के डी गुप्ता, जयपुर क्षेत्र-द्वितीय के अतिरिक्त मुख्य अभियंता सुभांशु दीक्षित, अक्षय उर्जा के वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा, चूरू के मुख्य अभियंता निरिल कुमार, निलंबित अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना, सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता डी के गौड़ और सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी को गिरफ्तार किया गया। बिना काम किए उठाए करोड़ों के भुगतान जल जीवन मिशन घोटाला प्रदेश के बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में से एक है। इसमें हर घर जल योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में नल कनेक्शन देने के नाम पर 960 करोड़ रुपए से ज्यादा की हेराफेरी की गई। मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोप्राइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए। इसी आधार पर पीएचईडी विभाग के अधिकारियों के साथ बड़े टेंडर लिए। फिर घटिया क्वालिटी के पाइपों का इस्तेमाल कर राजस्व का नुकसान पहुंचाया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कई जगहों पर बिना काम किए ही करोड़ों के भुगतान उठा लिए।


