जेजेएम घोटाला-रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल के वकील केस से हटे:हाईकोर्ट में अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की लगाई थी याचिका; दो दिन बाद ही केस छोड़ा

जेजेएम घोटाले में फंसे रिटायर्ड IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके वकील दीपक चौहान केस से हट गए है। उन्होंने अपना वकालतनामा वापस लेने का प्रार्थना-पत्र दायर किया हैं। वकील दीपक चौहान ने 19 फरवरी को अग्रवाल की ओर से ACB की एफआईआर को रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट में लगाई थी। याचिका पर इस सप्ताह सुनवाई संभव थी। इससे पहले ही चौहान ने खुद को केस से अलग कर लिया। अब नया वकालतनामा दायर होने पर ही केस सुनवाई के लिए लिस्ट होगा। बता दें कि 18 फरवरी सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था। ताकि वो देश नहीं छोड़ पाएं। ACB उनकी तलाश कर रही है। याचिका में कहा था- 95 फीसदी टैंडर सुधांश पंत ने स्वीकृत किए याचिका में कहा गया है कि सुबोध अग्रवाल का PHED ((पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट) में 18 अप्रैल 2022 से कार्यकाल शुरू हुआ था। इससे पहले गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल की ओर से इरकॉन के फर्जी प्रमाण-पत्र पेश कर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के कार्यकाल में ही टेंडर प्राप्त कर लिए थे। याचिका में कहा गया कि आरोपी फर्म को दिए गए 95 फीसदी वर्कऑर्डर तत्कालीन एसीएस सुधांश पंत की अध्यक्षता में बनी वित्त कमेटी ने मंजूर किए थे। केवल 10 फीसदी से भी कम वेल्यू के टेंडर की स्वीकृति याचिकाकर्ता के कार्यकाल में दी गई थी। लेकिन एसीबी ने इस संबंध में कोई जांच नहीं की। दोनों फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया सुबोध अग्रवाल ने याचिका में कहा कि उनकी अध्यक्षता में गठित वित्त कमेटी ने स्वीकृत किए गए टेंडर में एक भी पैसा दोनों फर्मों को नहीं दिया। इससे सरकार को याचिकाकर्ता के कार्यकाल में कोई आर्थिक क्षति नहीं हुई। इरकॉन से ईमेल आते ही याचिकाकर्ता ने हाईलेवल कमेटी का गठन किया। इस कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही याचिकाकर्ता के कार्यकाल में दोनों फर्म का टेंडर निरस्त कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया और अधिकारी विशाल सक्सेना पर भी कानूनी कार्रवाई की भी गई। एसीबी की ओर से विशाल सक्सेना के बयानों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की है, जबकि याचिकाकर्ता ने विशाल सक्सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके चलते वह याचिकाकर्ता से ईर्ष्या रखता है। —
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रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की:कहा- 95 फीसदी वर्कऑर्डर सुधांश पंत के कार्यकाल में जारी हुए (पढ़िए पूरी खबर) अपने क्षेत्र से जुड़ी समस्या को दैनिक भास्कर एप के सिविक इश्यू में पोस्ट करना के लिए क्लिक करें।

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