झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने कहा कि यह याचिका काफी देर से दायर की गई। जबकि, याचिकाकर्ताओं को मूल्यांकन प्रक्रिया की जानकारी पहले ही सार्वजनिक रूप से मिल चुकी थी। यह याचिका प्रार्थी अयूब तिर्की और राजेश प्रसाद की ओर से दाखिल की गई थी। उन्होंने कहा कि जेपीएससी ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का विज्ञापन जारी किया था। जिसमें वे भी शामिल हुए थे। पर, आयोग ने अंकों का मूल्यांकन नियमानुसार नहीं किया गया था। मूल्यांकन करने वालों की शैक्षणिक योग्यता भी मानक के अनुरूप नहीं थी। इसलिए परिणाम रद्द होना चाहिए। जेपीएससी की सफाई: मूल्यांकन की प्रक्रिया सार्वजनिक थी जेपीएससी ने कोर्ट को बताया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया की जानकारी प्रमुख अखबारों में प्रकाशित हुई थी। ऐसे में यह दावा करना कि जानकारी नहीं थी, गलत है। याचिका दाखिल करने में अत्यधिक देरी हुई है। आयोग चयनित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुला चुका है। अदालत ने कहा कि देरी से याचिका दाखिल करना सही नहीं है। आपको पता था कि आयोग डिजिटल रूप में मूल्यांकन करा रहा है, तो उसी समय चुनौती दी जानी चाहिए थी।


