जेल जाने वाला नाबालिग छात्र बोला– मेरा करियर बचा लीजिए:कहा– पुलिसकर्मियों से मिन्नतें करता रहा; जिन नेताओं संग प्रदर्शन किया, वह नहीं पहचान रहे

मैं जेलकर्मियों से बार-बार कह रहा था कि सुबह 9 बजे से 12वीं का पेपर है। मुझे जल्दी जाने दीजिए, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी। जिन युवक कांग्रेस नेताओं के साथ प्रदर्शन कर रहा था, वही पहचानने से इनकार कर रहे। पेपर दिलवा दीजिए, मेरा करियर बर्बाद होने से बचा लीजिए। यह कहना है 12वीं के नाबालिग छात्र का। 8 फरवरी को शहडोल कलेक्टर ने सीएम के काफिले को काले झंडे दिखाने के आरोप में छात्र समेत तीन लोगों को जेल भेज दिया था। गलती का अहसास होने पर रिहा भी करवा दिया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। नतीजा, वह अंग्रेजी का पहला पेपर नहीं दे सका। कांग्रेस प्रदेशाध्य जीतू पटवारी शुक्रवार को नाबालिग छात्र से मिलने शहडोल आ रहे हैं। छात्र ने कलेक्टर केदार सिंह से अपना करियर बचाने की गुहार लगाई है। छात्र मूल रूप से मऊगंज जिले का रहने वाला है। शहडोल के बुढ़ार क्षेत्र में चाचा के यहां रहकर पढ़ाई कर रहा है। वास्तविक उम्र 17 साल 5 महीने है। दैनिक भास्कर की टीम छात्र से मिलने उसके गांव पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट … परिजन बोले- सुबह से कुछ खाया-पीया भी नहीं गांव में स्थित छात्र के घर के बाहर दो लोग बड़े से कूलर की सफाई कर रहे हैं। यहां पास ही रखी बेंच पर माथे पर हाथ रखे एक 16-17 साल का लड़का बैठा है। घर के बड़े उसे ऐसा करने मना कर रहे हैं, लेकिन उसके चेहरे पर बेचैनी साफ झलक रही है। रुक-रुककर वो फिर से माथे पर हाथ रखकर बैठ जाता है, जैसे बड़ा अपशुकन या अनर्थ हो गया हो। परिवारवालों को पहले अपना परिचय दिया। इसके बाद छात्र के बारे में पूछा, परिवार के पुरुष सदस्य कहते हैं- ये ही तो है। मना करने पर भी ऐसे बैठ रहा है, जैसे मातम मना रहा है। सुबह से कुछ खाया-पीया भी नहीं है। उससे पूछा- क्या हुआ था उस दिन?, वो कहता है- मेरा दोष नहीं था। छात्र बोला– किसी ने डंडा मारा, फिर थाने ले गए छात्र ने कहा- 8 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहडोल के धनपुरी आने वाले थे। हमारे पास पहले से मैसेज आ गया था। गांव के दोस्तों के साथ उस जगह पहुंच गया, जहां से सीएम साहब का काफिला गुजरने वाला था। बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी, लेकिन हम लोगों ने सीएम के काफिले को काले झंडे दिखा ही दिए। जब मैं सड़क पर नारेबाजी लगा रहा था, तभी मुझे किसी ने पीछे से जोर से डंडा मारा। इसके बाद पुलिसवालों ने पकड़ लिया। जूते और लात से पीटा। इसके बाद अस्पताल ले गए, पर दवाई नहीं दी। मैं दर्द से कराह रहा था। मेरे साथ कई लोगों को पुलिसवाले थाने लेकर आ गए। एक-एक कर एक–दो घंटे में उन्हें छोड़ भी दिया। सोच रहा था कि मुझे भी छोड़ देंगे। रात के 10 बज गए थे। घबराहट होने लगी थी, लेकिन अंदाजा नहीं था कि बुढार जेल भेज दिया जाएगा। रात में ही जेल भेज दिया गया। इधर, 10 फरवरी को 12वीं की अंग्रेजी की बोर्ड परीक्षा थी। सालभर तैयारी की थी। जेल में कपड़े उतरवाए, बहुत डर लग रहा था बुढार जेल के अंदर जाते ही अजीब सा लग रहा था। डर सा गया। कागजों पर दो-तीन जगह नाम लिखवाया गया। इसके बाद एक अंकल ने किनारे बुलाकर एक-एक कर कपड़े उतरवाए। मैं समझ नहीं पा रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है। बहुत डर लग रहा था। अंदर ले जाकर बैरक में बंद कर दिया। बैरक में कंबल मिला, जमीन पर लेटकर रात काटी। सुबह 6 बजे जगाया गया, प्रार्थना करवाई गई। बहुत भूख भी लग रही थी। दो दिन से ढंग से कुछ नहीं खाया था। शाम को मजबूरी में थोड़ा बहुत खाया। जेलकर्मियों या कैदियों ने मारा-पीटा नहीं, पर माहौल देखकर घबराहट होती रही। जेलकर्मी बोला- परीक्षा है, तुम्हें छोड़ा जाएगा छात्र ने बताया कि 9 फरवरी की रात करीब 10 बजे जेलकर्मी आया। पूछा- क्या कल तुम्हारी परीक्षा है? मेरे हां कहने पर वो चले गए। कुछ देर बाद वीडियो कॉल पर एक अधिकारी से बात कराई। उन्होंने कहा- कल सुबह तुम्हें रिहा कर दिया जाएगा। मेरे साथ दो दोस्त भी जेल में थे। मैंने उनसे कहा कि उन्हें भी छोड़ दीजिए। इस पर उन्होंने कहा- आदेश सिर्फ मेरे लिए है, क्योंकि परीक्षा है। कई बार पुलिस को पेपर के बारे में बताया मैं बार-बार पुलिसकर्मियाें से कह रहा था कि 10 फरवरी की सुबह 9 बजे से पेपर है, मुझे जल्दी जाने दीजिए। लेकिन, उन्होंने नहीं सुनी। सुबह 7 बजे आखिरकार रिहा किया गया। जेल से निकलते ही पैदल बस स्टैंड की तरफ भागा। रास्ते में एक पुलिस अंकल से लिफ्ट ली। उन्होंने बस स्टैंड छोड़ दिया। मैंने परीक्षा के बारे में बताया, तो उन्होंने 50 रुपए दिए। मोबाइल नंबर भी दिया कि घर पहुंचकर बताना। करीब 8.45 पर घर पहुंचा। वहां से एडमिट कार्ड लेकर रघुराज स्कूल स्थित परीक्षा केंद्र की ओर भागा। आखिरकार 10 बजे वहां पहुंचा। लेकिन, तब तक देर हो चुकी थी। गेट पर रोक दिया गया। गेट पर खड़े एक टीचर ने कहा- एक घंटे से ज्यादा हो गया, अब अंदर नहीं जा सकते। जेल में बिताए 40 घंटे नहीं भूल पा रहा छात्र छात्र ने बताया कि मैंने 40 घंटे जेल में बिताए हैं। एक-एक पल 40 बरस जैसा लगा। मेरे साथ ऐसा होगा, सोचा नहीं था। जेल के अंदर का एक-एक चेहरा और बाकी के नजारे बार-बार आंखों के सामने आ जाते हैं। अब दूसरे पेपर की तैयारी तो कर रहा हूं, लेकिन मन नहीं लग रहा। छात्र की हालत देखकर परिजन भी परेशान हैं। वे कहते हैं-बहुत समझा रहे हैं, लेकिन असर नहीं हो रहा। बेटे को अकेला नहीं छोड़ रहे। रात में चौंक कर उठ जाता है। बार-बार पानी पीता है। पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा रहा। कलेक्टर से मांग- परीक्षा की व्यवस्था करा दीजिए छात्र का कहना है कि मैंने अब तक कोई अपराध नहीं किया। माता-पिता गांव में खेती-किसानी करते हैं। जब अधिकारियों को पता था कि 10 फरवरी को पेपर है, तो 9 तारीख को क्यों नहीं छोड़ा। अगर ऐसा हो जाता, तो मैं पास जरूर हो जाता। छात्र का कहना है कि जब कलेक्टर पास नाबालिग को जेल भेजने की पावर है, तो क्या मुझे दोबारा परीक्षा नहीं दिलवा सकते? मेरी 12वीं की अंग्रेजी की परीक्षा की व्यवस्था कर दीजिए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले- राजनीतिक द्वेष से भेजा जेल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी ने बताया कि निर्दोष कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। राजनीतिक द्वेष के तहत जेल भेजा गया। इसी के विरोध में मंगलवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने धरना देकर ज्ञापन सौंपा था। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शहडोल पहुंचेंगे। यहां कलेक्टोरेट का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा। वकील बोले- प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन किया सीनियर वकील प्रदीप सिंह का कहना है कि नाबालिग छात्र समेत तीन लोगों को धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। दिनभर जमानत के लिए कोशिश की गई, लेकिन तहसीलदार ने मना कर दिया। शाम को अफसर चले गए। बाद में सभी के आधार और मार्कशीट बुलवाई। इनमें एक छात्र नाबालिग निकला। इसके बाद प्रशासन की नींद खुली। प्रशासन ने कहा कि नाबालिग की जमानत कर दे रहे हैं, बाकी पर विचार करेंगे, लेकिन हम तीनों की जमानत पर अड़े थे। दूसरे दिन प्रशासन ने खुद ही नाबालिग को छोड़ दिया। उसका पेपर भी छूट गया। प्रशासन ने गलत कार्रवाई की है। थाना प्रभारी को गिरफ्तारी के पहले आधार देखना चाहिए था। दूसरी ओर तहसीलदार ने भी इसे नहीं देखा। बाद में भी नियमानुसार पुलिस को छात्र के परिजन को सुपुर्द करना चाहिए था। अब हाईकोर्ट में याचिका लगाएंगे। एसपी बोले– तहसीलदार के बोलने से जेल भेजा गया एसपी रामजी श्रीवास्तव का कहना है कि मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान व्यवधान उत्पन्न करने वाले तीन लोगाें को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने गिरफ्तार लोगों द्वारा बताए गए नाम और उम्र के आधार पर दस्तावेज तैयार कर उन्हें कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से जेल भेजने का आदेश हुआ। इस खबर पर आप अपनी राय दे सकते हैं… ये खबर भी पढ़ें-
सीएम के विरोध पर नाबालिग को जेल…12वीं की परीक्षा छूटी शहडोल जिले में प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां 17 साल 8 महीने 19 दिन उम्र के छात्र को वयस्क मानकर जेल भेज दिया गया। इसके कारण छात्र मंगलवार को 12वीं बोर्ड की अंग्रेजी विषय की परीक्षा नहीं दे सका। पढ़ें पूरी खबर…

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