विदिशा जिले के गंजबासौदा में जेल प्रहरी की प्रताड़ना से तंग आकर युवक ने आत्महत्या करने की कोशिश की। युवक अंकित दुबे ने जेल प्रहरी रामबाबू शर्मा पर काली कमाई का पैसा सूदखोरी में लगाकर मनमाना ब्याज वसूलने का आरोप लगाया है। इसमें प्रहरी के साथ अन्य अधिकारियों के शामिल होने की बात भी कही है। आरोप 64.33 लाख के बदले 83.62 लाख दिए
गल्ला व्यापारी अंकित दुबे का आरोप है कि प्रहरी ने सूदखोरी में चलाने के लिए पहले उसे 2 लाख नकद दिए। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, चेक व नकदी के रूप में 64.33 लाख रुपए और दिए। अंकित का दावा है कि उसने रामबाबू को 10 महीने में कुल 83.62 लाख रुपए लौटाए।
इसके बावजूद रामबाबू ने कहा कि जो राशि लौटाई, वह तो ब्याज था। अब भी 50 लाख रुपए बकाया हैं। प्रताड़ना से तंग आकर अंकित ने आत्महत्या की कोशिश की। परिजनों ने समय रहते अस्पताल पहुंचाया, जिससे जान बच गई। अंकित ने पुलिस स्टेशन, एसपी कार्यालय, लोकायुक्त व जेल मुख्यालय में शिकायत की, पर कार्रवाई नहीं हुई। 5 माह में 575 ट्रांजैक्शन, 33.49 लाख प्रहरी, 3 लाख पत्नी के खाते में, 45 लाख नकद भी व्यापारी ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए 33.49 लाख रुपए रामबाबू और 3 लाख रुपए उसकी पत्नी के बैंक अकाउंट में भेजे। इसके अलावा 45 लाख रुपए नकद अलग दिए। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से सामने आया पूरा खेल, पर कार्रवाई नहीं जेल की काली कमाई को सूदखोरी में लगाने के मामले का पूरा खेल अंकित दुबे, प्रहरी रामबाबू शर्मा व उनकी पत्नी के बैंक खातों में फोन पे के जरिए लेन-देन से पुख्ता होता है। रामबाबू व अंकित के बीच 13 मई 2024 से 16 नवंबर 2024 तक 575 बार लेन-देन हुआ। रामबाबू के एसबीआई और एचडीएफसी बैंक के खातों में 1 हजार रुपए से 90,000 रुपए दिए गए। इसी तरह रामबाबू की पत्नी के खातों में 30 मई 2024 से 26 सितंबर 2024 तक 73 से अधिक ट्रांजैक्शन हुए हैं। रामबाबू ने अलग-अलग नंबरों पर भी रुपए ट्रांसफर करवाए। 10 से 11 लोगों को पैसा बांटना है, ऊपर से दबाव है’ अंकित ने रामबाबू की रकम सूदखोरी के ‘डेली कलेक्शन’ के साथ अनाज के भंडारण में लगाई थी। हालांकि, जब रामबाबू ने 50 लाख रुपए और मांगे तो अंकित ने कलेक्शन का काम बंद करने और हिसाब करने को कहा। तब दोनों के बीच फोन पर हुई बातचीत में रामबाबू ने कहा कि यह अकेली उसकी रकम नहीं है। इसमें जेलर साहब का भी रुपया लगा है। एक चेक जो पोस्ट ऑफिस का दिया था, वो उन्हीं ने दिया था। रामबाबू ने कहा कि 10 से 11 लोगों को ये पैसा लौटाना है। इसकी वजह से उसके ऊपर भी दबाव है। जेलर वाली बात ऐसे ही बोली अंकित ने जरूरत के लिए मुझसे रुपए लिए थे। मामला बासौदा थाने में विवेचना में है, इसलिए कितने रुपए हैं, ये मैं नहीं बता सकता। इसमें जेलर साहब या किसी और का पैसा नहीं है। फोन पर हो सकता है मैंने बोल दिया हो, ताकि ये पैसा दे दे। – रामबाबू शर्मा, जेल प्रहरी, उप जेल यह उनके आपस का मामलाजेल प्रहरी और अंकित का आपसी मामला है। रामबाबू ने बताया कि मैंने अंकित को डराने के लिए जेलर का पैसा बताया। रामबाबू सेना से रिटायर है। उसके पास अच्छी खासी संपत्ति है, पर रुपए ब्याज पर देना सही नहीं है। आलोक भार्गव, सहायक जेल अधीक्षक जेल प्रहरी व व्यापारी के बीच लेन-देन का मामला संज्ञान में आया है। जांच करा रहे हैं। -जीपी सिंह, डीजी, जेल


