जैसलमेर में एंट्री के लिए टैक्स देना होगा:माउंट-पुष्कर की तरह टोल नाके लगेंगे; जानें कितनी होगी देनी होगी फीस

22 साल बाद टूरिस्ट को जैसलमेर में एंट्री करने के लिए टैक्स देना होगा। नगर परिषद ने शहर में प्रवेश करने वाले पर्यटक वाहनों पर Passenger Tax लगाने का फैसला किया है। राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है और 28 जनवरी को इसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है। नगर परिषद कमिश्नर लजपाल सिंह सोढा के अनुसार, शहर में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पर्यटन सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। 1 फरवरी से होना था लागू, अब तैयारी अंतिम चरण में नगर परिषद कमिश्नर लजपाल सिंह सोढा ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशों के बाद 28 जनवरी को गजट नोटिफिकेशन प्रभावी हो गया है। उन्होंने कहा- प्रशासनिक तौर पर हमें इसे 1 फरवरी से लागू करना था, लेकिन वर्तमान में जिन सड़कों (जोधपुर और बाड़मेर रोड) पर नाके बनाए जाने हैं, वहां निर्माण और तकनीकी कार्य चल रहा है। जैसे ही नाकों का काम पूरा होगा, बहुत जल्द पुख्ता योजना बनाकर यात्री कर की प्रणाली को शुरू कर दिया जाएगा। किसे देना होगा टैक्स और किसे मिलेगी छूट? नगर परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह कर मुख्य रूप से पर्यटकों और व्यावसायिक वाहनों पर केंद्रित है। जैसलमेर के स्थानीय निवासियों की निजी (प्राइवेट) गाड़ियों को इस टैक्स से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। जैसलमेर नंबर की स्थानीय टैक्सियां और बाहर से आने वाली सभी टैक्सी गाड़ियां इस दायरे में आएंगी। वाहनों की श्रेणी के अनुसार 50 रुपए से लेकर 200 रुपए तक का शुल्क तय किया गया है। शहर के इन दो रास्तों पर होगी ‘नाकाबंदी’ पर्यटकों की भारी आवक को देखते हुए नगर परिषद ने शहर के दो सबसे व्यस्त प्रवेश द्वारों को चुना है। यहां से जयपुर, जोधपुर और बीकानेर की तरफ से आने वाले सैलानियों के वाहनों की एंट्री होगी। गुजरात और दक्षिण राजस्थान से आने वाले पर्यटक इसी रास्ते से जैसलमेर में प्रवेश करते हैं। इन दोनों पॉइंट्स पर आधुनिक टोल नाके बनाए जाएंगे, जहां रसीद काटने के बाद ही वाहनों को शहर में प्रवेश मिलेगा। क्यों पड़ी यात्री कर की जरूरत? जैसलमेर की जनसंख्या कम है, लेकिन पर्यटन सीजन (अक्टूबर से मार्च) के दौरान यहां लाखों की संख्या में सैलानी उमड़ते हैं। भारी भीड़ के कारण कचरे का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हजारों वाहनों की आवाजाही से शहर की सड़कें जल्दी क्षतिग्रस्त होती हैं। पर्यटन सीजन में जाम की स्थिति और बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है। राजस्व से बदलेगी स्वर्ण नगरी की सूरत नगर परिषद को इस यात्री कर से सालाना लाखों रुपए की आय होने की उम्मीद है। कमिश्नर सोढा ने बताया कि इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से तीन कार्यों में किया जाएगा: पर्यटन स्थलों का संरक्षण और सौंदर्यकरण। शहर की सफाई व्यवस्था को हाईटेक बनाना। सड़कों की मरम्मत और नई सुविधाओं का विस्तार। नगर परिषद का मानना है कि इस टैक्स से मिलने वाला पैसा सीधे तौर पर जैसलमेर के विकास में लगेगा, जिससे भविष्य में आने वाले पर्यटकों को और भी बेहतर अनुभव मिल सकेगा। फिलहाल, परिषद जल्द से जल्द नाकों का निर्माण पूरा कर इस व्यवस्था को ‘फुल प्रूफ’ बनाने में जुटी है।

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