राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए बजट का जैसलमेर में विरोध हुआ। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के बैनर तले गुरुवार को कर्मचारियों ने गांधी दर्शन के सामने बजट की प्रतियां जलाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि प्रशासन “धरातल” से कट चुका है और केवल कागजी आंकड़ों और ब्रांडिंग के दम पर राज करने की कोशिश कर रहा है। AC कमरों से बाहर निकले सरकार: बिश्नोई महासंघ के जिला महामंत्री प्रकाश बिश्नोई खारा ने सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “सरकार सिर्फ टेंट, इवेंट, टारगेट और रैंकिंग के झूठे आंकड़ों में गुमराह है। मंत्री और अधिकारी एसी कमरों में बैठकर वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के जरिए राज चला रहे हैं, जबकि हकीकत में जमीनी स्तर पर कर्मचारी त्रस्त हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना अड़ियल रवैया नहीं बदला, तो आने वाले समय में आंदोलन और उग्र होगा। संवादहीनता की शिकार सरकार विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि जैसलमेर जैसे सीमांत जिले में बजट की प्रतियां जलना इस बात का प्रमाण है कि सरकार ‘संवादहीन’ हो चुकी है। जब सरकार अपने ही कर्मचारी संगठनों की बात नहीं सुन रही, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान केवल कल्पना मात्र है। इस विरोध प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि 8.50 लाख नियमित कर्मचारियों और लाखों मानदेय कर्मियों की नाराजगी सरकार के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है। बजट में क्या रहा नदारद? कृषि पर्यवेक्षक अमनदीप और जिला अध्यक्ष भंवरलाल गर्ग के नेतृत्व में कर्मचारियों ने बजट की कमियों को गिनाया: आठवां वेतन आयोग: कर्मचारियों का आरोप है कि केंद्र के 2027 वाले फॉर्मूले का समर्थन कर केवल कमेटी बनाने के नाम पर ‘छलावा’ किया गया है। संविदा और मानदेय कर्मी: प्रदेश के करीब 5 लाख संविदा कर्मियों और 2.5 लाख मानदेय कर्मियों के लिए बजट में एक भी बड़ी घोषणा नहीं की गई। पदोन्नति और वेतन विसंगति: पिछले बजट में कैडर पुनर्गठन का वादा किया गया था, जिसे इस बार पूरी तरह भुला दिया गया।


