जैसलमेर में खुली पहली आर्ट गैलरी:पूर्व न्यायाधीश की स्मृतियां और नन्हे हाथों का जादू, देशभर के कला प्रेमियों का जमावड़ा

जैसलमेर के कला परिदृश्य में एक नया अध्याय जुड़ गया है। रामगढ़ रोड स्थित माणक नगर में ‘जी.एस. गोस्वामी आर्ट एकेडमी’ के तत्वावधान में जे.एस.वी. (जनार्दन शशि व्यास) आर्ट गैलरी का उद्घाटन हुआ। इस पहली कला वीथी का लोकार्पण सेवानिवृत्त न्यायाधिपति मनोज के. व्यास एवं न्यायाधिपति बी.एन. भट्ट द्वारा किया गया। यह गैलरी स्वर्गीय जनार्दन व्यास (पूर्व न्यायाधीश) की पावन स्मृति को समर्पित है। आर्ट गैलरी में कई कलाकारों की पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया गया, सभी मेहमानों ने पेंटिग्स को सराहा और आर्ट गैलरी का निरिक्षण किया। गौरतलब है कि ये जैसलमेर की पहली आर्ट गैलरी है जिसमें कई कलाकारों की पेंटिग्स को लगाया गया है। कला साधना का जीवंत केंद्र समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि न्यायाधिपति मनोज के. व्यास ने कहा कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि शाश्वत मूल्यों की संवाहक है। उन्होंने स्व. जनार्दन व्यास के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “कला कालजयी होती है और संस्कारों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाती है। इसके सौम्य रूप को अभिव्यक्त करना ही सच्ची कला साधना है।” विशिष्ट वक्ता न्यायाधिपति बी.एन. भट्ट ने भारतीय वांग्मय के परिप्रेक्ष्य में कला की व्याख्या की। उन्होंने जैसलमेर में आर्ट एकेडमी और कला रेजीडेंसी की स्थापना को एक ऐतिहासिक कदम बताया, जो नवोदित कलाकारों और स्थापित दिग्गजों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगी। डॉ. मनमोहन व्यास ने इसे जैसलमेर के लिए एक विशेष उपलब्धि करार दिया। प्रदर्शनी में दिखी विविध रंगत गैलरी के उद्घाटन अवसर पर स्व. जनार्दन व्यास के जीवन वृत्त से संबंधित दुर्लभ छायाचित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही, शशि व्यास की पेंटिंग्स और नन्ही कलाकार पूर्वा गोस्वामी व रुद्रिका सुथार की बाल कृतियों ने मन मोह लिया। इस आयोजन में पुणे, मुंबई, जोधपुर, पाली और अहमदाबाद सहित देश के विभिन्न हिस्सों से कला प्रेमी शामिल हुए। गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम का आगाज प्रोफेसर लक्ष्मीकांत व्यास द्वारा राजस्थानी भाषा में स्वागत उद्बोधन से हुआ। डॉ. घनश्याम गोस्वामी ने एकेडमी के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की, वहीं एडवोकेट एन. के. बंसल ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। पुणे से आईं डॉ. कोमल सिंह ने भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर डॉ. नीतल, विश्वनाथ नावन्दर, प्रो. श्रेयांस व्यास, प्रो. कृतिका व्यास, पर्यटन अधिकारी कमलेश्वर सोलंकी, आईदानसिंह सोलंकी सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक और कला प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कला के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का संकल्प दोहराया गया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *