जैसलमेर में टीचर्स ने काली पट्टी बांध जताया विरोध:संविदा भर्तियों पर रोक और Raj-CES के विलय की मांग, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) के आह्वान पर बुधवार को जिले के प्राध्यापकों और शिक्षाविदों ने Raj-CES (राजसेस) महाविद्यालयों में संविदा नियुक्तियों के विरोध में स्वर मुखर किए। महासंघ ने राज्य सरकार द्वारा कॉलेज शिक्षा में लागू की जा रही संविदा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के विरुद्ध बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है। हाथों पर काली पट्टी बांधकर जताया विरोध विरोध प्रदर्शन के दौरान महासंघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर सरकार की नीतियों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। इसके पश्चात, जिला कलेक्टर प्रतापसिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान चयन प्रक्रिया न केवल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को भी रसातल में ले जाने वाली है। “बिना स्थायी ढांचे के कैसे लागू होगी NEP-2020?” महासंघ के जिलाध्यक्ष डॉ. श्यामसुंदर मीणा ने बताया कि “Raj-CES योजना के तहत संचालित महाविद्यालयों का वर्तमान स्वरूप और संचालन प्रणाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के विपरीत है। इन कॉलेजों में स्थायी अकादमिक ढांचे का अभाव है, शोध और नवाचार की कोई संभावना नहीं है और अपर्याप्त संसाधनों के भरोसे नए विषय घोषित किए जा रहे हैं।” आंकड़ों में शिक्षा का संकट: कुल Raj-CES कॉलेज: 374 (पूर्व सरकार के 303 और वर्तमान सरकार के 71)। शून्य शिक्षक वाले कॉलेज: लगभग 260 महाविद्यालयों में एक भी स्थायी संकाय सदस्य नहीं है। विवाद का कारण: भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 में 5 वर्ष के लिए ‘फिक्स्ड पे’ पर संविदा नियुक्तियां करना। प्रमुख मांगें और चेतावनी महासंघ ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि: सोडाणी समिति की सिफारिशों को अविलंब लागू किया जाए। सभी 374 Raj-CES महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों में तब्दील कर नियमित पद सृजित किए जाएं। भर्ती कैलेंडर-2026 में शामिल टीचिंग एसोसिएट और अशैक्षणिक संवर्गों की संविदा चयन प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगे।

डॉ. श्यामसुंदर मीणा, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बोले- “संविदा आधारित अध्यापन व्यवस्था उच्च शिक्षा को अस्थाई बनाने का संस्थागत प्रयास है। यदि सरकार ने समय रहते सोडाणी समिति की सिफारिशों को लागू नहीं किया और संविदा भर्तियों को रद्द नहीं किया, तो प्रदेश भर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।”

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