जैसलमेर में बोरवेल में फूटी जलधारा का राज:वैज्ञानिकों का दावा- 60 लाख साल पुराना पानी निकल रहा, सरस्वती नदी को लेकर भी दावा

28 दिसंबर, जैसलमेर की मोहनगढ़ तहसील का चक 27 बीडी गांव। स्थानीय निवासी विक्रम सिंह के खेत में ट्यूबवेल खोदा जा रहा था। अचानक जमीन के अंदर से जलधारा फूट पड़ी। देखते ही देखते खेत व उसके आस-पास का इलाका जलमग्न हो गया। वहां खड़ी बोरिंग मशीन और ट्रक जमीन में समाज गए। प्रशासन को 500 मीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को वहां से हटाना पड़ा। इस घटना के बाद से कई सवाल उठ रहे हैं… भास्कर ने जैसलमेर के भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास ईणखिया से बात की और इन सभी सवालों के जवाब जाने… सवाल : पानी 60 लाख साल पुराना है, ये दावा किस आधार पर किया जा रहा है?
जवाब : ट्यूबवेल से पानी के साथ काफी मात्रा में सफेद रंग की रेत बाहर आई है। यह रेत टर्शरी काल की है। जिसकी जमीन में हिस्ट्री करीब 60 लाख साल पुरानी है। इसके नीचे दबा पानी भी इतना ही पुराना है। इस पानी और मिट्‌टी की पूरी हिस्ट्री जानने के लिए आईआईटी जोधपुर के विशेषज्ञों को बुलाया गया। उन्होंने इसके सैंपल दिए है। सवाल : जैसलमेर में तो जल संकट है, फिर वहां इतना पानी?
जवाब : जमीन के नीचे सेंड स्टोन (घीया पत्थर) की 200 मीटर की मोटी परत है। इसी के नीचे ग्राउंड वाटर दबा हुआ है। इस परत को पंक्चर करते ही पानी तेजी से उन पंक्चर से बाहर निकलते लगता है। यह प्रेशर जब तक रहता है जब तक की परत के नीचे पानी का लेवल सही नहीं हो जाता है। इसके बाद ट्यूबवेल से निकलने वाली पानी की स्पीड कम हो जाती है। सवाल : इससे पहले भी ट्यूबवेल खोदी गई है, तब वहां पानी क्यों नहीं निकला?
जवाब : मोहनगढ़ और नाचणा इन दोनों क्षेत्रों में सेलो सिपेज ट्यूबवेल खोदी जाती है। इनकी गहराई ज्यादा से ज्यादा 30 मीटर फीट तक होती है। इस क्षेत्र में गहरी टयूबवेल न के बराबर है। क्षेत्र में पहली बार 260 मीटर गहरी ट्यूबवेल को खोदा गया। इसके चलते सेंड स्टोन की परत के नीचे दबा पानी तेजी से प्रेशर के साथ बाहर निकलने लगा। प्रेशर से निकलने वाले इस पानी को बाहर निकलने का एक ही रास्ता मिला। सवाल : सरस्वती नदी का पानी इस क्षेत्र के ग्राउंड लेवल में मिलता है क्या…?
जवाब : जैसलमेर में सरस्वती नदी का बहाव क्षेत्र आता है। इसकी जल रेखाएं जमीन के नीचे से निकलती हैं। इसका पानी जमीन के नीचे सैंड स्टोन की परत से ऊपर की तरफ ही रहता है। वह पानी मीठा होता है। सवाल : जमीन से निकल रहा यह पानी किस काम में आ सकता है?
जवाब : जमीन से निकल रहे पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। यह पीने के लिए कितना उपयोगी है यह जांच के बाद ही पता चलेगा। क्योंकि पानी का स्वाद खारा है। ऐसे में उम्मीद जताई जा सकती है कि जैसलमेर में आने वाली कैनाल के पानी के साथ मिलाकर इसका उपयोग खेती में किया जा सकेगा। सवाल : पानी के साथ कौन सी गैस निकल रही है?
जवाब : जैसलमेर की जमीन के नीचे से गैस निकलनी आम बात है। पानी के साथ जो गैस निकल रही है वह खतरनाक नहीं है। इसका उपयोग ईंधन में हो सकता है या किसी और उपयोग के लायक है। इसको लेकर जांच की जा रही है। गैस के कारण ही पानी का प्रेशर और ज्यादा बढ़ गया था। संभावना है कि जमीन से निकल रहे पानी के नीचे काफी मात्रा में गैस भी भरी हुई है। इसी कारण से पानी को और ज्यादा प्रेशर मिला। मीठे पानी के लिए की जा रही थी खुदाई
अधिकारियों ने बताया कि विक्रम सिंह के खेत में जीरे के फसल की बुवाई हुई थी। खेती के लिए उसने खेत में ट्यूबवेल खुदवाना शुरू किया था। सात दिन से खुदाई का काम चल रहा था। एक जगह पानी आने के बाद मीठे पानी की तलाश में खुदाई को जारी रखा गया। शनिवार सुबह दस बजे अचानक ट्यूबवेल से तेजी से पानी बाहर निकलने लग गया। अधिकारियों ने बताया कि मोहनगढ़ क्षेत्र में लोगों ने काफी कम ट्यूबवेल खुदवा रखी है। पूरे क्षेत्र में मात्र 44 ट्यूबवेल है। गैस की करवाई जा रही है जांच
जैसलमेर जिला कलेक्टर प्रताप सिंह ने बताया कि मोहनगढ़ में ट्यूबवेल से पानी के साथ निकल रही गैस की जांच के लिए केयर्न एनर्जी कम्पनी व ONGC के विशेषज्ञों को मौके पर बुलाया गया है। प्रथम तौर पर गैस को खतरनाक नहीं बताया गया है। जमीन से बाहर निकल रही गैस कौन-कौन सी है। इसके लिए सैंपल भेजे गए हैं। रिपोर्ट आते ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

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