सीमावर्ती जिले जैसलमेर में 6 से 8 मार्च तक ऐतिहासिक ‘चादर महोत्सव’ का आयोजन होने जा रहा है। जैन समुदाय के इस सबसे बड़े समागम के लिए स्वर्णनगरी पूरी तरह तैयार है। कार्यक्रम का शुभारंभ 6 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत करेंगे। वहीं, महोत्सव के दूसरे दिन 7 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पहुंचने की संभावना है। तीन दिवसीय इस आयोजन में देश-विदेश से करीब 20 से 30 हजार श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। आलम यह है कि 6 से 8 मार्च के बीच जैसलमेर के लगभग सभी छोटे-बड़े होटल और रिसॉर्ट पूरी तरह बुक हो चुके हैं। श्रद्धालुओं की भारी आवक को देखते हुए शहर में उत्सव जैसा माहौल है। एक महीने से चल रही तैयारी महोत्सव का मुख्य केंद्र शहर का डेडानसर मैदान है, जहां पिछले एक महीने से भव्य डोम और टेंट सिटी बनाने का काम जारी है। जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली ने बताया कि मैदान में एक विशेष संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है। आयोजन समिति के चेयरमैन मंगल प्रभात लोढ़ा (मंत्री, महाराष्ट्र सरकार) के अनुसार, यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक जागरण का अभियान है। डेडानसर मैदान में बनी ‘टेंट सिटी’ डेडानसर मेला मैदान में पिछले एक महीने से युद्ध स्तर पर तैयारियां चल रही हैं, जिसे अंतिम रूप देने के लिए करीब 300 श्रमिक दिन-रात जुटे हुए हैं। महोत्सव के भव्य आयोजन के लिए मेला मैदान में कुल 5 विशाल डोम स्थापित किए गए हैं। आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य डोम 1 लाख स्क्वायर फीट के विशाल डोम में मुख्य सभा, सामूहिक इकतीसा पाठ और संतों के प्रवचन होंगे। यहां 12 हजार श्रद्धालुओं के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई हैं। वहीं 50-50 हजार स्क्वायर फीट के पांच डोम बनाए गए हैं, जिनका उपयोग म्यूजियम, भोजन शाला के रूप में किया जाएगा। 7 मार्च को बनेगा विश्व रिकॉर्ड: 1.08 करोड़ लोग करेंगे सामूहिक पाठ कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण 7 मार्च को होने वाला ‘सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ’ है। दावा किया जा रहा है कि निर्धारित समय पर पूरी दुनिया में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु सामूहिक पाठ करेंगे, जो एक ऐतिहासिक कीर्तिमान होगा। इसी दिन जैसलमेर किले से भव्य ‘चादर वरघोड़ा’ (जुलूस) निकाला जाएगा। आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वर महाराज ने बताया कि आचार्यश्री जिन मनोज्ञ सागर की प्रेरणा से 7 मार्च को सुबह 11.45 बजे विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ किया जाएगा। कार्यक्रम गच्छाधिपति आचार्यश्री मणिप्रभसूरी की निश्रा में संपन्न होगा। महोत्सव में 871 वर्षों बाद दादा गुरुदेव के चादर का पहली बार विधिवत अभिषेक होगा। 7 मार्च जैसलमेर किले से वरघोड़े के साथ चादर को महोत्सव स्थल पर लाया जाएगा। सामूहिक इकतीसा का पाठा होगा। दोपहर में चादर अभिषेक और पूजा होगी। सिक्का और विशेष डाक टिकट का विमोचन होगा 6 मार्च को महोत्सव की शुरूआत गच्छाधिपतिश्री, आचार्य, उपाध्याय सहित भगवंतों के मंगल प्रवेश से होगी। चादर समारोह में सिक्का और विशेष डाक टिकट का विमोचन होगा। 8 मार्च को उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा। साथ ही गणिनी पद समारोह भी आयोजित होगा। इसी दिन चादर ओक जल और वासक्षेप को वितरण होगा। श्रद्धालुओं को दादा गुरुदेव के जीवन से रूबरू कराने के लिए 50 हजार स्क्वायर फीट के एक डोम में एक विशेष म्यूजियम तैयार किया गया है। उनकी जीवनी, जैन परंपराओं, इतिहास और दुर्लभ मूर्तियों का प्रदर्शन किया जाएगा। समिति के सचिव पदम टाटिया के अनुसार इस महोत्सव में करीब 20 से 30 हजार श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। साधु-साध्वी पैदल विहार कर जैसलमेर पहुंच रहे जैन धर्म की कठिन चर्या का पालन करते हुए देश के विभिन्न कोनों से साधु-साध्वी पैदल विहार कर जैसलमेर पहुंच रहे हैं। आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वर महाराज स्वयं 2500 किमी की लंबी पदयात्रा कर जैसलमेर पहुंचे हैं। इसी तरह मनीष सागर महाराज ने 1800 किमी का सफर पैदल तय किया है। इतिहास में पहली बार करीब 871 वर्षों के अंतराल के बाद दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसुरि जी की पवित्र चादर का विधिवत अभिषेक किया जाएगा। यह चादर 11वीं शताब्दी से सुरक्षित है और जैन समाज में अटूट आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि करीब 145 साल पहले जैसलमेर में फैली महामारी के दौरान इसी चादर के प्रभाव से संकट दूर हुआ था। तीन दिवसीय कार्यक्रम का शेड्यूल: 6 मार्च: गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरी जी का मंगल प्रवेश, मोहन भागवत द्वारा शुभारंभ, विशेष डाक टिकट व सिक्के का विमोचन। 7 मार्च: 1.08 करोड़ लोगों का सामूहिक पाठ, किला दुर्ग से भव्य जुलूस, चादर अभिषेक और सांस्कृतिक संध्या। 8 मार्च: उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को ‘आचार्य’ पद की पदवी, चादर ओक जल एवं वासक्षेप का वितरण।


