जोड़बीड़ गिद्ध संरक्षण क्षेत्र और आस -पास से गुजर रही बिजली की हाई टेंशन लाइनें प्रवासी पक्षियों के मौत की वजह बन रही हैं। पिछले एक महीने में एक दर्जन से अधिक स्टेपी ईगल, इजिप्शियन वल्चर और यूरोशियन ग्रेफॉन प्रजाति के पक्षियों की मौत हो चुकी है। जोड़बीड़ गिद्ध संरक्षण क्षेत्र दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा गिद्ध एवं शिकारी पक्षी आवास स्थल माना जाता है। इस क्षेत्र के आसपास खुले विद्युत पोलों और ट्रांसमिशन लाइनों से टकराने व करंट लगने के कारण स्टेपी ईगल और इजिप्शियन वल्चर यूरेशियन ग्रेफॉन सहित कई प्रवासी पक्षियों की मौत हो चुकी हैं। विशेषज्ञों और संरक्षण कार्यकर्ताओं ने इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के इस स्थल के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति बताया है। जोरबीड़ में इन दिनों मध्य एशिया, रूस, मंगोलिया और यूरोप से आए हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा है। बड़े आकार और लंबे पंख फैलाव वाले शिकारी पक्षी अक्सर भोजन स्थल के आसपास लगे विद्युत पोलों पर बैठते हैं। इसी दौरान खुले तारों के संपर्क में आने से उन्हें घातक करंट लग जाता है। पिछले एक माह में ही 12 से अधिक प्रवासी पक्षियों की मृत्यु विद्युत पोलों से टकराने अथवा करंट लगने के कारण हो चुकी है। पर्यावरणविदों के अनुसार क्षेत्र के आसपास तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और नई आवासीय कॉलोनियों के विकास के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। विद्युत अवसंरचना को पक्षी-अनुकूल बनाने के लिए प्रभावी कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई है। बिजली की तारों को अंडरग्राउंड या इंसुलेटेड करना चाहिए इजिप्शियन वल्चर पहले ही संकटग्रस्त श्रेणी में है और स्टेपी ईगल की वैश्विक आबादी भी लगातार घट रही है। नई विकसित कॉलोनियों में बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड करने तथा मौजूदा ओवरहेड लाइनों पर बर्ड डाइवर्टर, इंसुलेटेड क्रॉस-आर्म्स और अन्य बर्ड सेफ्टी उपकरण लगाने चाहिए। ये उपाय अपेक्षाकृत कम लागत में पक्षियों की जान बचाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं। जोड़बीड़ गिद्ध संरक्षण क्षेत्र विश्व के मानचित्र पर है। इसके आसपास आबादी एरिया बसने से पक्षियों व वन्य जीवों के आवास पर संकट खड़ा हो जाएगा। सरकार को इसे गंभीरता से लेकर विकल्प तलाश करना होगा। सबसे पहले प्रवासी पक्षियों को बचाने का काम करें। उधर जोड़बीड़ में दिखा गुरुड़ जोड़बीड़ में विश्व की सबसे बड़ी सफेद पूंछ वाली समुद्री चील नजर आई है, जिसे गुरुड़ भी कहा जाता है। चील के ग्रीनलैंड व जर्मनी की तरफ से आने की जानकारी मिली है। वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ जितेंद्र सोलंकी ने बताया कि वहा जब ठंड ज़्यादा हो जाती है तो यह शीतकालीन प्रवास के लिए भारत में कभी कभी आती है। गरुड़ का नजर आना पक्षी प्रेमियों के लिए रोमांच भरा संकेत है। जोड़बीड़ में भोजन की उपलब्धता के संदेश समुद्री पक्षियों तक पहुंचना भी रोचक और शोधपरक है। सोलंकी ने बताया कि जोड़बीड़ में डेजर्ट फॉक्स की कॉलोनी भी मिली है। खुंखार कुत्तों के डर से लोमड़ियां बहुत कम नजर आती हैं। हाल ही में लोमड़ी अपने तीन बच्चों के साथ खाने की तलाश में बाहर घूमते देखी गई है।


