जोधपुर की पहली महिला महापौर डॉ. ओमकुमारी गहलोत का निधन:नगर निगम बनने के बाद पहली व अब तक की एकमात्र कार्यकाल पूरा करने इतिहास भी इन्हीं के नाम

जोधपुर शहर में नगर निगम बनने के बाद पहली महिला महापौर बनने वाली डॉ. ओमकुमारी गहलोत का सोमवार रात को निधन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार सुबह 11 बजे उनके निवास स्थान सोजती गेट बेरियां मोहल्ले से महामंदिर रामबाग मोक्षधाम जाएगी। उल्लेखनीय है कि डॉ. गहलोत शहर की मौजूदा दोनों महिला महापौर से पहले तक के नगर निगम के इतिहास में एकमात्र महिला महापौर रहीं, जिन्होंने अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया था। महापौर की भूमिका में आने से पहले शिक्षाविद् डॉ. ओमकुमारी सरकारी नौकरी में रहीं, तो वहां के प्रशासनिक अनुभव का फायदा उन्हें नगर निगम की बागडोर संभालने में मददगार साबित हुई। उनके महापौर बनने के समय भाजपा की सरकार थी और बोर्ड कांग्रेस का था, इसके चलते कई बार उन्हें बजट की समस्या से भी सामना करना पड़ता था। सरकार की इसी चुनौती को उन्होंने न सिर्फ स्वीकार किया और सरकारी विभागों से ही अधिकांश राजस्व की वसूली की थी। यही वजह थी कि उस वक्त के 60 पार्षदों में से जिसने भी जहां भी विकास कार्य कराने की मांग की, उसे उन्होंने आमदनी के हिसाब से पूरा कराने का प्रयास किया था। जीवन परिचय डॉ. ओमकुमारी गहलोत का जन्म वर्ष 1937 में पिता बस्तीराम गहलोत के यहाँ हुआ। उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी पर रहते हुए, लॉ के क्षेत्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने में पहली महिला होने का गौरव भी हासिल किया। बाद में सहायक उप निदेशक के पद से सेनानिवृत हुईं। वे लगातार 12 साल तक संयुक्त सचिव पद पर (भारत स्काउट गाइड, जोधपुर मण्डल) रहने के बाद उप-प्रधान पद पर भी कार्यरत रहीं। उन्हें कलक्टर द्वारा 7 बार विभिन्न कार्य क्षेत्र में सम्मानित किया गया। माली समाज द्वारा 1985 में समाज विभूषण सम्मान से विभूषित किया गया। वर्ष 1983 में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राज्यपाल ने सम्मानित किया तथा वर्ष 1999 में बार-टू-मेडल ऑफ मेरिट पदक प्रदान किया गया। उन्होंने वैदिक कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक कक्ष का निर्माण, चौपासनी विठ्‌ठलेश्वर में एक ‘हट’ का निर्माण करवाया। हरिद्वार जोधपुर भवन में निर्माण और पावटा अस्पताल के निर्माण में भी आर्थिक सहयोग दिया। वे वर्ष 1999 में जोधपुर नगर निगम के वार्ड 41 से पार्षद चुनी गई तथा 4 नवंबर 2004 को इसी वार्ड से पुनः जीत कर महापौर की अहम जिम्मेदारी संभाली।

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