जयपुर में गोपालपुरा बाइपास स्थित उत्कर्ष कोचिंग सेंटर में हुए हादसे की प्रारंभिक जांच सामने आई है। नगर निगम मानसरोवर जोन उपायुक्त के स्तर पर हुई इस जांच में मीथेन गैस (सीवर चैंबर से निकले वाली गैस) से हादसा होने की बात से इंकार किया है। उपायुक्त मानसरोवर लक्ष्मीकांत कटारा ने ये प्राथमिक जांच रिपोर्ट नगर निगम ग्रेटर की कमिश्नर को सौंपी है। उपायुक्त ने बताया- घटना प्रथम मंजिल पर हुई है और जहां बच्चे बैठे थे वहां किसी भी तरह की सीवरेज की गंद या कोई जलने की बदबू नहीं आ रही थी। इसके अलावा नगर निगम की टीम ने कोचिंग सेंटर्स के आसपास के सीवर लाइन और चैंबर्स की भी जांच की तो वहां भी कोई ब्लॉकेज या भराव जैसी स्थिति नहीं मिली। साथ ही घटना से प्रभावित हुए बच्चों से जब बयान लिए तो उसमें उन बच्चों ने मिर्च की गंध आने की बात कही। बड़े चैम्बर में पड़ता है मीथेन का प्रभाव नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक अगर कोई सीवरेज से आने वाली मीथेन गैस से ये घटना होती तो इसका प्रभाव सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर पर दिखता। अमूमन मीथेन गैस का इस तरह का प्रभाव बड़े सीवरेज चैंबर (200 से 900MM की लाइन से जुड़े) के अंदर या उसके आसपास रहता है। एफएसएल ने लिए पानी के लिए इधर इस घटना के बाद एफएसएल की टीम ने यहां पानी की सैंपल लिए है। वहीं बेहोश हुए बच्चों से जब बातचीत की तो उन्होंने भी मिर्ची की धांस और छोंक जैसी गंध आने की बात कही है। इन अधिकारियों की बनाई जांच कमेटी नगर निगम प्रशासन ने इस पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी कल बना दी थी। इस कमेटी में अधिशाषी अभियंता संदीप माथुर, एटीपी सीमा माथुर, रेवेन्यू ऑफिसर सुनील बैरवा, एएफओ देवांग यादव, सीएसआई सुरेश कुमार और एआरआई नेहा मण्डावरिया शामिल है।


