रामानुजगंज में आयोजित बहुदिवसीय ज्ञानोत्सव 2026 कार्यक्रम में रविवार को “चाबी वाले बाबा” के नाम से प्रसिद्ध हरिश्चंद्र विश्वकर्मा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के रोहनिया खास निवासी बाबा अपने साथ 20 किलोग्राम वजनी लोहे की एक बड़ी चाबी लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जिसे देखने और उनके विचार सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। बाबा की यह विशेष चाबी, जिस पर ‘श्री राम’ अंकित है, ‘राम नाम की चाबी’ के रूप में जानी जाती है। उनके अनुसार, यह चाबी सतयुग के द्वार खोलने और मानव जीवन में नैतिक जागरण का प्रतीक है। रामानुजगंज में ज्ञानोत्सव के मंच से उन्होंने समाज में बढ़ती अनैतिकता, भ्रष्टाचार और भटकाव को दूर करने के लिए आध्यात्मिक चेतना की आवश्यकता पर बल दिया। युवाओं को भारतीय संस्कृति अपनाने का संदेश कार्यक्रम के दौरान बाबा ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में ही गृह त्याग कर वे वर्षों से पदयात्राओं के माध्यम से जनजागरण का कार्य कर रहे हैं। वे स्वयं को स्वामी विवेकानंद से प्रेरित मानते हैं और आध्यात्म को जीवन का आधार बताते हैं। 2025 महाकुंभ में 20 किलो की चाबी से आए थे चर्चा में बता दें कि बाबा 2025 के महाकुंभ में भी अपनी 20 किलो की चाबी के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे थे। रामानुजगंज के ज्ञानोत्सव में उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम को विशेष पहचान मिली और स्थानीय श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखा गया। ज्ञान उत्सव में प्रतिदिन हो रहे प्रवचन और सांस्कृतिक आयोजन आयोजकों ने बताया कि ज्ञान उत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन प्रवचन, भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आध्यात्मिक चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। चाबी वाले बाबा के संदेश ने उपस्थित जनसमूह को आत्मचिंतन और नैतिक जागरूकता की प्रेरणा दी। उन्होंने यह भी बताया कि वे सामाजिक चिंतक और विचारक बजरंग मुनि के विचारों से प्रभावित होकर रामानुजगंज पहुंचे हैं, जहां वे ज्ञान प्रवाह में शामिल हो रहे हैं।


