झाबुआ में सामाजिक महासंघ की ओर से ‘राष्ट्रवाद, धर्म जागरण एवं सनातन संस्कारों की पाठशाला’ कार्यक्रम हो रहा है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से परिचित कराना है। यह पाठशाला शहर के बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
पाठशाला में बच्चों को शब्दों और मंत्रों की महिमा समझाई गई मोना गिधवानी ने पाठशाला में बच्चों को शब्दों और मंत्रों की महिमा समझाई। उन्होंने बताया कि ‘गायत्री महामंत्र’ जैसे दिव्य मंत्रों के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें सीधे मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय करती हैं। उनके अनुसार, मंत्रों का नियमित जाप तनाव बढ़ाने वाले ‘कोर्टिसोल’ हार्मोन को कम करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
सामूहिक हनुमान चालीस पाठ से होती है शुरुआत यह पाठशाला प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे शुरू होती है। सत्र का आरंभ सामूहिक श्री हनुमान चालीसा के पाठ से होता है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है। योग गुरु देवेंद्र सोनी बच्चों को योग, प्राणायाम और हास्यासन के माध्यम से शारीरिक व मानसिक रूप से सुदृढ़ रहने के गुर सिखा रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय संयोजक ओमप्रकाश शर्मा ने बच्चों को सनातन परंपराओं के वैज्ञानिक आधार से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये परंपराएं केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरती हैं। राधेश्याम परमार ने सूर्य को जल अर्पण करने और तिलक लगाने के पीछे की सकारात्मक ऊर्जा के महत्व को समझाया। बच्चों के लिए हुई सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता सामाजिक महासंघ के जिलाध्यक्ष डॉ. नीरजसिंह राठौर ने बच्चों की बौद्धिक क्षमता का आकलन करने के लिए सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित की। पाठशाला की एक खास बात यह है कि यहाँ शिक्षा को बोझिल नहीं बनाया गया है। सत्र के अंत में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले-चकरी की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, सभी बच्चों को पौष्टिक अल्पाहार भी दिया जा रहा है, ताकि वे खेल-खेल में संस्कारों को आत्मसात कर सकें। इस पाठशाला का लक्ष्य केवल धार्मिक शिक्षा प्रदान करना नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को नशा मुक्ति, स्वदेशी सोच और राष्ट्रप्रेम के प्रति जागरूक करना भी है।


