उदयपुर में राजस्थान स्टेट माइंस एण्ड मिनरल्स (RSMM) नवाचार के तहत झामरकोटड़ा खनन क्षेत्र के ओवरबर्डन और वेस्ट मटेरियल को रिसाइकल करके आधुनिक और समकालीन मूर्तिकला (मॉडर्न एण्ड कंटेम्परेरी स्कल्पचर) के लिए उपयोग करेगा। यह बात आज जयपुर में आरएसएमएम के चेयरमैन मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताई। वे शुक्रवार को सचिवालय में आरएसएमएम की 422 वीं बोर्ड बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। चेयरमैन ने बताया कि बताया कि इसके लिए आरएसएमएम द्वारा संगतराश नाम से इनोवेटिव कार्यक्रम आरंभ किया गया है। ये नवाचार पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक व गुड गवर्नेंस दायित्व की दिशा में बढ़ता कदम हैं। उन्होंने बताया कि खानों में खनन के दौरान ओवरबर्डन और वेस्ट मेटेरियल के कारण पर्यावरण प्रदूषण व अपशिष्ट के उपयोग नहीं होने से विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि संगतराश नवाचार से जहां एक और आधुनिक और समकालीन शिल्पकला को प्रोत्साहन मिलेगा वहीं युवाओें को रोजगार और आय के साधन विकसित होंगे। श्रीनिवास ने आरएसएमएम के केमिकल फर्टिलाइजर रॉक फास्फेट-जिप्सम आदि की जीरो लॉस तकनीक से उत्पादन बढ़ाने और किसानों तक उपलब्ध कराने पर जोर दिया ताकि कृषि पैदावार में बढ़ोतरी हो सके। उन्होंने बदलते माइनिंग सिनेरियों के अनुसार आरएसएमएम में मानव संसाधन का पुनर्गठन करने और माइनिंग व जियोलोजी सेक्टर के तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ाने पर जोर दिया। प्रमुख सचिव माइंस टी. रविकान्त ने बताया कि संगतराश नवाचार कार्यक्रम का एक अन्य लाभ कला और शिल्प को बढ़ावा देने के साथ ही शहरी सौन्दर्यीकरण में किया जा सकेगा। उन्होंने आरएसएमएम को आक्रामक विपणन नीति अपनाने के साथ ही जीरो लॉस माइनिंग पर जोर देना होगा ताकि उत्पादकता और लाभदायकता में बढ़ोतरी हो सके। अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण आनन्द कुमार ने भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आरएसएमएम की पहल की सराहना की। आरएसएमएम की प्रबंध निदेशक प्रज्ञा केवलरमानी ने आरएसएमएम की गतिविधियों और उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्लोबल इंडिया स्टोनमार्ट में आरएसएमएम के पेवेलियन को पहला पुरस्कार मिला हैं। वहीं सामाजिक कोरपोरेट दायित्व के तहत उदयपुर में खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।


