भास्कर एक्सक्लूसिव झारखंड गठन के बाद से सत्ता में पिछड़ों और अति पिछड़ों की भागीदारी का सर्वेक्षण शुरू हो चुका है। पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से जानकारी मांगी है। मध्य प्रदेश के मॉडल पर राज्य में पिछड़ों के शैक्षणिक और आर्थिक स्थितियों की जांच भी शुरू होने वाली है। आईआईएम या इसके समकक्ष संस्थानों को यह काम सौंपा जाएगा। सोमवार को आयोग की हुई बैठक में इसके लिए टेंडर निकालने का फैसला लिया है। उल्लेखनीय है कि नगर निकायों में आरक्षण देने के लिए आयोग ने पिछड़ों की जनसंख्या का सर्वे कराया है। पिछड़ा आयोग ने पूछा है कि वर्ष 2000 के बाद अब तक पिछड़े वर्ग के कितने सांसद बने। राज्य में पिछड़े वर्ग के विधायकों की संख्या अब तक कितनी रही। राज्यसभा सदस्य, मेयर, डिप्टी मेयर, निकायों के वार्ड सदस्य, जिला परिषद अध्यक्ष, जिला पार्षद, प्रखंड प्रमुख, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया और पंचायतों के वार्ड सदस्यों की कुल संख्या में पिछड़े और अति पिछड़ों की संख्या कितनी रही, यह जानकारी भी देने को कहा गया है। आयोग यह रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा। सत्ता के टॉप टू बॉटम में मूलवासी कितने : आयोग राज्य की सत्ता में पिछड़ों की भागीदारी के सर्वेक्षण के क्रम में झारखंड के मूलवासी पिछड़ों और दूसरे राज्यों के पिछड़ों की तुलना करनी है। यह बताना है कि सत्ता के बॉटम से लेकर टॉप तक के पदों पर जो पिछड़े रहे हैं, उनमें झारखंड के रहनेवाले कितने और झारखंड के बाहर के कितने हैं। सरकार को सौंपी जाएगी सम्यक रिपोर्ट : मेहता पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य एनके मेहता ने कहा कि सरकार को सम्यक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र भेजा गया है, जिसमें उनसे यह बताने का आग्रह किया गया है कि राज्य गठन के बाद से लेकर अब तक पिछड़े वर्ग के कितने जनप्रतिनिधियों की सत्ता में प्रत्यक्ष भागीदारी रही है। कल्याण विभाग से आग्रह, जल्द हो अध्यक्ष की नियुक्ति पिछड़ा वर्ग आयोग ने कल्याण विभाग से आग्रह किया है कि अध्यक्ष की नियुक्ति जल्द करें। अध्यक्ष नहीं होने से कई काम अटके हैं। नगर निकायों में पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों की सर्वेक्षण रिपोर्ट तब तक सरकार को नहीं सौंपी जा सकती, जब तक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो जाती। जानकारी के अनुसार कल्याण विभाग ने अध्यक्ष की नियुक्ति की फाइल मुख्यमंत्री को भेजी है। शैक्षणिक-आर्थिक स्थिति जांची जाएगी में पिछड़े वर्ग के विधायकों की संख्या अब तक कितनी रही। राज्यसभा सदस्य, मेयर, डिप्टी मेयर, निकायों के वार्ड सदस्य, जिला परिषद अध्यक्ष, जिला पार्षद, प्रखंड प्रमुख, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया और पंचायतों के वार्ड सदस्यों की कुल संख्या में पिछड़े और अति पिछड़ों की संख्या कितनी रही, यह जानकारी भी देने को कहा गया है। आयोग यह रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा।


