सीजीपीएससी और महादेव सट्टा के बाद अब झारखंड शराब घोटाले में भी सीबीआई की एंट्री हो गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने EOW में दर्ज 450 करोड़ रुपए के झारखंड शराब घोटाले की सीबीआई जांच की अनुमति के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। माना जा रहा है कि, शराब घोटाले की जांच जल्द ही सीबीआई शुरू कर देगी, क्योंकि इस मामले में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन जांच के घेरे में हैं। झारखंड सरकार की ओर से ईओडब्ल्यू को कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। इसलिए अब इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई है। छत्तीसगढ़ ACB-EOW ने 7 सितंबर 2024 को दर्ज की थी FIR झारखंड में शराब घोटाला छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग में हुए बड़े घोटाले की तरह ही हुआ है। इसका खुलासा छत्तीसगढ़ एसीबी-ईओडब्ल्यू की तरफ से 7 सितंबर को दर्ज एफआईआर से हुआ है। इस एफआईआर में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के सचिव रहे आईएएस विनय कुमार चौबे और पूर्व संयुक्त आयुक्त आबकारी गजेंद्र सिंह का नाम भी शामिल है। रायपुर ईओडब्ल्यू ने दोनों अफसरों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत नया केस दर्ज किया था। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला सिंडिकेट से जुड़े तमाम लोगों के नाम भी इसमें शामिल है। जानिए एफआईआर में क्या है ? यह एफआईआर आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दर्ज की है। इसमें कहा गया है कि, तत्कालीन आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और उनके सिंडिकेट ने झारखंड के अधिकारियों के साथ मिलीभगत की। इन सभी ने मिलकर झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव की साजिश रची। इसके बाद राज्य में देशी और विदेशी शराब का टेंडर भी सिंडिकेट के लोगों को ही दिया गया। झारखंड में देशी शराब की बिक्री के लिए बिना हिसाब-किताब के डुप्लीकेट होलोग्राम का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, FL10A लाइसेंस के रूप में नियम बनाकर विदेशी शराब की आपूर्ति का काम करीबी एजेंसियों को दिया गया। इसके बाद उन कंपनियों से करोड़ों रुपए का अवैध कमीशन लिया गया। इससे करोड़ों रुपए की अवैध कमाई हुई। झारखंड में लागू हुई छत्तीसगढ़ की व्यवस्था झारखंड और छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले दोनों आपस में जुड़े हुए हैं। क्योंकि झारखंड में छत्तीसगढ़ की व्यवस्था लागू की गई और झारखंड शराब घोटाले की जांच जब सीबीआई ने शुरू की तो इसका असर छत्तीसगढ़ में भी दिखेगा। इस घोटाले में जिन छत्तीसगढ़ के अधिकारियों की भी भूमिका रही है, उनसे भी पूछताछ की जा सकती है। छत्तीसगढ़ के अफसरों और मिलकर झारखंड में शराब घोटाला किया। रांची के कारोबारी विकास सिंह की शिकायत पर सीजी एसीबी-ईओडब्ल्यू ने यहां 450 करोड़ के शराब घोटाले का मामला दर्ज किया है। कारोबारी ने आरोप लगाया है कि, इससे वहां की सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ है। उनकी भूमिकाओं की जांच की जा रही है नई शराब नीति लागू करने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाया गया था योजना के तहत राज्य में इस योजना को लागू करने के लिए अनवर ढेबर, एपी त्रिपाठी और झारखंड के आबकारी सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त आबकारी आयुक्त गजेंद्र सिंह ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को विश्वास में लिया। इसके बाद झारखंड राज्य में नई आबकारी नीति को लागू करने की तैयारी की गई। इसके लिए झारखंड विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड के एमडी अरुणपति त्रिपाठी को सलाहकार के तौर पर रखा गया था। प्लानिंग के मुताबिक अरुण पति त्रिपाठी ने छत्तीसगढ़ में लागू की जाने वाली नीति का मॉडल तैयार कर झारखंड सरकार को दिया था। इसके आधार पर राज्य में नई उत्पाद शुल्क नियमावली, झारखंड उत्पाद (झारखंड राज्य पेय पदार्थ निगम लिमिटेड के माध्यम से खुदरा उत्पाद दुकानों का संचालन) नियमावली 2022 लागू की गई। इसके लिए अरुणपति त्रिपाठी ने सरकार से 1.25 करोड़ फीस भी ली थी। होलोग्राम की आपूर्ति भी छत्तीसगढ़ की तरह सिंडिकेट ने होलोग्राम सप्लाई का काम मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी एंड सिक्योरिटी फिल्म प्राइवेट लिमिटेड नोएडा के विधु गुप्ता को दिलवाया, जो छत्तीसगढ़ में होलोग्राम सप्लाई करते हैं। विधु गुप्ता ने भी होलोग्राम खुद सप्लाई नहीं किया, बल्कि ओकुलर होलोग्राफी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को काम दे दिया। 1 मई 2022 से इनका अवैध शराब का कारोबार पूरे झारखंड में शुरू हो गया। इस तरह छत्तीसगढ़ के सिंडिकेट ने इस कारोबार को सरकारी नियमों के दायरे में लाकर करोड़ों रुपए कमाए। छत्तीसगढ़ के साथ-साथ झारखंड सरकार को भी चूना लगाकर खुद को फायदा पहुंचाते रहे। रायपुर में बैठक आयोजित छत्तीसगढ़ के सिंडिकेट ने झारखंड में भी अवैध शराब का कारोबार करने की मंशा से जनवरी 2022 में झारखंड के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। यह बैठक रायपुर में हुई थी, जहां पूरी प्लानिंग बनी थी। नीति कार्यान्वयन के बाद झारखंड के राजस्व में गिरावट प्राथमिकी में शिकायतकर्ता विकास सिंह ने कहा है कि झारखंड में 2022-23 में नई शराब नीति लागू होने के बाद झारखंड के उत्पाद शुल्क राजस्व लक्ष्य में करोड़ों रुपए की कमी आई है। शिकायतकर्ता ने इसकी जांच की मांग की है। अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, सिद्धार्थ सिंघानिया, विधु गुप्ता और उनके सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही झारखंड के आबकारी सचिव विनय कुमार चौबे, संयुक्त आबकारी आयुक्त गजेंद्र सिंह और उनके सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कारण राज्य को नुकसान पहुंचाने के आरोप में कार्रवाई की मांग की गई।


