झालावाड़ में शहर के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल रैन बसेरा के पुनर्निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जिला पर्यटन विकास समिति ने इसे आमजन और पर्यटकों के लिए जल्द खोलने और सड़क मार्ग सहित अन्य शेष कार्यों को पूरा करने की मांग की है। समिति के पदाधिकारी ओम पाठक ने बताया कि कोटा रोड पर स्थित लकड़ी से बना यह रैन बसेरा करीब 14 साल पहले आग लगने से नष्ट हो गया था। सरकार और प्रशासन के प्रयासों से अब इसका पत्थर, सीमेंट और लोहे से दोबारा निर्माण किया गया है, जो लगभग अंतिम चरण में है। रैन बसेरा स्थल पर हुई संगोष्ठी
पुनर्निर्माण कार्य पूरा होने के अवसर पर मंगलवार को पर्यटन विकास समिति ने रैन बसेरा स्थल पर एक संगोष्ठी आयोजित की। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने श्रीकृष्ण सागर तालाब की पाल के निर्माण के लिए आवंटित बजट पर सरकार और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। समिति के संयोजक ओम पाठक ने जिला प्रशासन से शेष निर्माण कार्य जैसे बाउण्ड्रीवॉल, धूपघड़ी, नए बाग-बगीचे, छायादार वृक्ष और व्यवस्थित पहुंच मार्ग का निर्माण शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस स्थल पर सुंदर पार्क विकसित कर इसे पर्यटकों के लिए खोला जाना चाहिए, क्योंकि झालावाड़ जिले के जनमानस की भावनाएं इससे जुड़ी हैं और सभी इसका इंतजार कर रहे हैं। इतिहासकार ललित शर्मा ने बताया कि यह रैन बसेरा अगस्त 1937 में जन्माष्टमी के अवसर पर महाराज राजेंद्र सिंह द्वारा कृष्ण सागर तालाब के किनारे स्थापित किया गया था। इसे देहरादून वन शोध संस्थान से लाकर पर्यटन के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से लगाया गया था।
शर्मा ने स्थल पर जल व्यवस्था की महती आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन को पूर्व और वर्तमान निर्माण की जानकारी दर्शाने वाला एक शिलालेख भी लगाना चाहिए। इस अवसर पर गोष्ठी में समिति के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रेन बसेरा पर्यटक स्थल का सम्बन्धित विभाग को सौंप कर इसको सुचारू रूप से संचालित कराया जाए, इस विचार संगोष्ठी में भगवती प्रकाश मेहर, मनजीत सिंह कुशवाह, सूरजकरण नागर, लक्ष्मीकान्त पहाड़िया, कन्हैयालाल कश्यप, हरिमोहन, खबरचन्द, डालू आदि मौजूद रहे।


