झुंझुनूं में डॉक्टरों का काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन:खाना छोड़ा, नियम के खिलाफ बर्खास्त करने का आरोप

झुंझुनूं के मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य डॉ. राकेश साबू के खिलाफ चिकित्सकों का आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। ‘सेवारत चिकित्सक संघ (ARISDA)’ के आह्वान पर जिलेभर के करीब 400 डॉक्टर सोमवार को लगातार नौवें दिन काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। विवाद ने सोमवार को नया मोड़ तब लिया, जब बर्खास्त किए गए चिकित्सकों ने अन्न त्याग कर धरना शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो वे पूर्ण अनशन पर बैठेंगे। नियमों के विरुद्ध की गई बर्खास्तगी संघ के जिला प्रवक्ता डॉ. विजय झाझड़िया ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना से ही कई चिकित्सक निःशुल्क शिक्षण कार्य कर रहे थे, लेकिन उन्हें हटाना राजकीय नियमों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि एक ओर मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी है, दूसरी ओर अनुभवी शिक्षकों को बर्खास्त करना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय है। इसे चिकित्सकों के सम्मान पर आघात बताया गया। 6 डॉक्टरों की बर्खास्तगी से बढ़ा विवाद पिछले छह महीनों में मेडिकल कॉलेज से छह चिकित्सकों की कथित ‘नियम विरुद्ध’ बर्खास्तगी ने विवाद हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि प्राचार्य ने गतिरोध खत्म करने या संवाद स्थापित करने की कोई पहल नहीं की, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है। अन्न त्याग से बढ़ा दबाव सोमवार से बर्खास्त चिकित्सकों ने दिनभर अन्न त्याग कर विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारी डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे। मरीजों की सेवाएं रहेंगी जारी चिकित्सकों ने आश्वस्त किया है कि बुधवार से प्रस्तावित दो घंटे के कार्य बहिष्कार के दौरान भी मरीजों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी, ताकि किसी भी गंभीर मरीज को परेशानी न हो। बड़ी संख्या में डॉक्टर रहे मौजूद विरोध प्रदर्शन में संघ के महासचिव डॉ. राजेंद्र ढाका सहित जिले के सैकड़ों चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे। आंदोलनकारी चिकित्सकों का कहना है कि जब तक बर्खास्तगी के आदेश वापस नहीं लिए जाते, उनका विरोध जारी रहेगा।

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