झुंझुनूं में ‘वायरल’ का बुखार:एक हफ्ते में 15 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे अस्पताल, सांस लेने में तकलीफ ने बढ़ाई चिंता

जिले में मौसम के बदलते मिजाज ने आमजन की सेहत बिगाड़ दी है। दिन में तेज धूप और रात की गुलाबी ठंड के बीच वायरस और बैक्टीरिया सक्रिय हो गए हैं। जिला मुख्यालय स्थित राजकीय भगवानदास खेतान (BDK) अस्पताल सहित नवलगढ़, चिड़ावा, खेतड़ी और मलसीसर के सरकारी अस्पतालों की मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। बीते एक सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल बीडीके अस्पताल में ही मरीजों का आंकड़ा चौंकाने वाला है।
7 दिनों में 15,249 ओपीडी: लैब और डॉक्टरों पर बढ़ा दबाव अस्पताल प्रशासन के अनुसार 11 फरवरी से 18 फरवरी के बीच कुल 15,249 मरीज ओपीडी में पहुंचे हैं। औसतन हर दिन करीब 2,100 से 2,500 मरीज वायरल लक्षणों के साथ अस्पताल आ रहे हैं। 16 फरवरी को सबसे ज्यादा 2,741 मरीज दर्ज किए गए। 17 फरवरी को गंभीर लक्षणों के चलते 102 मरीजों को भर्ती करना पड़ा। एक सप्ताह में 577 मरीजों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें वार्डों में शिफ्ट किया गया।
रिपोर्ट नॉर्मल, फिर भी सांस लेने में परेशानी
इस बार का वायरल संक्रमण चिकित्सकों के लिए भी पहेली बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई मरीजों में सर्दी-जुकाम के साथ सांस लेने में तकलीफ (Respiratory Distress) जैसे लक्षण दिख रहे हैं। सबसे अजीब बात यह है कि इन मरीजों की प्राथमिक जांच रिपोर्ट सामान्य आ रही है, फिर भी रिकवरी में लंबा समय लग रहा है। सामान्यत 5-7 दिन में ठीक होने वाला वायरल बुखार इस बार 20-20 दिनों तक मरीजों को पस्त कर रहा है।
बच्चे और बुजुर्ग सॉफ्ट टारगेट; त्वचा रोगों में भी उछाल
बदलते तापमान का सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पर पड़ा है स्किन एलर्जी: चर्म रोग विभाग में भी मरीजों की कतारें लंबी हुई हैं। धूल भरे मौसम और तापमान के उतार-चढ़ाव से त्वचा संबंधी संक्रमण बढ़े हैं। कोविड जैसे लक्षण: कई मरीजों में तेज बुखार और सूखी खांसी देखी जा रही है, जो कोविड-19 के लक्षणों से मेल खाती है, जिससे आमजन में डर का माहौल है। वायरस के म्यूटेशन और लापरवाही ने बिगाड़े हालात चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि हर तीन साल में वायरस और बैक्टीरिया में म्यूटेशन (परिवर्तन) होता है, जिससे संक्रमण अधिक संक्रामक हो जाता है। इसके अलावा, लोग दिन की गर्मी देखकर गर्म कपड़ों का त्याग कर रहे हैं, जबकि रात और सुबह की ठंड शरीर के इम्यून सिस्टम को सीधे प्रभावित कर रही है। डॉ. जितेंद्र भांबू, PMO (बीडीके अस्पताल) ने बताया कि तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण शरीर का तापमान तालमेल नहीं बिठा पाता, जिससे वायरल अटैक आसान हो जाता है। फिलहाल कुछ दिन और सावधानी बरतने की जरूरत है। गर्म कपड़ों का प्रयोग बंद न करें और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, स्वयं दवा (Self-medication) न लें।

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