झुमरीतिलैया के शहरी क्षेत्र में पहुंचा हाथियों का झुंड:25 हाथियों ने मचाई दहशत, गेहूं की फसल और केले के पौधों को किया नष्ट

कोडरमा जिले में पिछले डेढ़ महीने से हाथियों का झुंड भ्रमण कर रहा है। वन विभाग द्वारा इन्हें बिहार के जंगलों में भेजने के प्रयास के बावजूद हाथी फिर कोडरमा लौट आए हैं। स्थानीय लोगों में दहशत मंगलवार की देर रात झुमरीतिलैया नगर परिषद के वार्ड नंबर 28 में हाथियों का झुंड पहुंच गया। मडुआटांड और यदुटांड़ क्षेत्र में हाथियों ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया। दीवार तोड़ने और हाथियों की आवाज से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। वर्तमान में हाथियों का झुंड एक बड़े बाउंड्री कैंपस में है। यहां लगे 400 केले के पौधों को हाथियों ने अपना भोजन बना लिया है। झुंड में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 25 हाथी हैं। पहली बार पहुंचा हाथियों का झुंड स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले कभी हाथियों को नहीं देखा गया था। वन विभाग को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची। विभाग पटाखे और आग का प्रयोग कर हाथियों को रिहायशी इलाकों से दूर भगाने का प्रयास कर रहा है। सिंचाई के अभाव में काफी मेहनत से तैयार किया था गेहूं का फसल
ग्रामीण रंजीत यादव ने बताया कि सिंचाई का बेहतर साधन नहीं होने के बाद भी उन्होंने गेहूं की फसल लगाई थी। हाल के दिनों में हुई बारिश की वजह से उन्होंने तैयार फसल को खेत में ही तिरपाल से ढंक कर रखा था। हाथियों के झुंड द्वारा फसल को काफी नुकसान पहुंचाया गया। इसमें उन्हें करीब एक लाख रुपए की क्षति हुई है। इस दौरान हाथियों के झुंड ने बिजली विभाग द्वारा लगाए गए चार से पांच विद्युत पोल को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है। उन्होंने बताया कि खेत में सिंचाई का साधन नहीं होने पर कुआं बनाकर उन्होंने काफी मेहनत से गेहूं की फसल तैयार की थी। अचानक पहुंचे हाथियों के झुंड ने करीब 15 एकड़ में लगे गेहूं को रौंद दिया है, जिससे उन्हें लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। महुआ की सुगंध की तरफ आकर्षित होते हैं हाथी
वन विभाग के एएसआई पंकज कुमार ने बताया कि पिछले दिनों जिले के ग्रामीण इलाकों में हाथियों के झुंड को देखा गया था। शहरी इलाके में हाथियों ने पहली बार प्रवेश किया है। अभी महुआ का सीजन है। हाथी इसकी सुगंध की तरफ आकर्षित होते हैं और उसी तरफ आगे बढ़ते हैं। उन्होंने लोगों से प्रशासन को सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि लोगों से वन विभाग अपेक्षा रखती है कि हाथियों को सुरक्षित जंगली क्षेत्र में पहुंचाने के लिए ग्रामीण कम आबादी वाले रास्ते को खाली रखेंगे ताकि वन विभाग की टीम हाथी को आबादी वाले इलाके से दूर कर सके। हाथियों द्वारा नुकसान पर मुआवजे का भी प्रावधान
इधर, वन प्रमंडल पदाधिकारी सौमित्र शुक्ल ने कहा कि हाथियों को गांव से जंगलों की ओर खदेड़ने के लिए 18 लोगों की क्यूआरटीटीम बनाई गई है, जो लगातार मुस्तैद है। इसके अलावा प्रभावित ग्रामीणों को होने वाले नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है। कुछ लोगों के मकान एवं बाउंड्री क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है। हाथियों द्वारा नुकसान पहुंचाने पर विभाग द्वारा मुआवजा देने का प्रावधान है। इसके लिए लोगों को वन प्रमंडल पदाधिकारी के पास आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा। पश्चिम बंगाल से एक विशेष टीम को बुलाया गया उन्होंने बताया कि दिन में हाथियों का मूवमेंट कम होता है। इन्हें सुरक्षित तरीके से जंगली क्षेत्र में पहुंचाने के लिए वन विभाग द्वारा पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा से एक विशेष टीम को बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि हाथियों के मूवमेंट के दौरान अपने घर के आसपास आग जलाकर रखें और बच्चों को दूर रखें।

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