टाइगर सफारी:टाइगर देखने के लिए आने वालों को मिल रहे मोर-गीदड़ व लेपर्ड, वीकेंड पर घटी पर्यटकों की संख्या

टाइगर यहां लाने के लिए कई चीजें देखनी होती हैं। जैसे आयु और पेयर आदि। चार से पांच जू के साथ एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत इसे यहां ला रहे हैं। जहां से जानवर लेने हैं, तो एक्सचेंज में जानवर देने पड़ते हैं। इसलिए हम अलग-अलग जू से संपर्क कर रहे है। जल्द ही मिल जाएंगे। हम लुधियाना के लिए परमानेंट टाइगर लाना चाहते हैं। टूरिस्ट कैंटीन और बैठने आदि की व्यवस्था भी कर रहे हैं।-बसंता राज कुमार आईएफएस, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पंजाब भास्कर न्यूज | लुधियाना जालंधर लुधियाना एनएच पर स्थित चिड़ियाघर जू टाइगर सफारी इन दिनों पूरी तरह बंद है। सफारी क्षेत्र में जहां कभी टाइगर की दहाड़ गूंजती थी, वहां अब मोर घूमते नजर आते हैं। पिछले एक साल से यहां एक भी टाइगर नहीं है। पहले सैलानियों को सफारी कराने के लिए दो बसें चलती थीं, लेकिन वे भी अब खड़ी हैं। वीकेंड पर जब टाइगर थे तो यहां 600 से 700 सैलानी आते थे। लेकिन अब इनकी संख्या 400 से 500 रह गई है। विभाग की तरफ से एक जोड़े टाइगर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा चिड़ियाघर में हिमालयन ब्लैक बियर और घड़ियाल भी जल्द लाने की प्लानिंग है। आने वाले कुछ महीनों में लोग इन जानवरों को चिड़ियाघर में देख सकेंगे। मौजूदा समय में यहां सिर्फ लेपर्ड ही आकर्षक जानवर है। इसके अलावा गीदड़, हिरन, बारहसिंघा समेत अन्य जानवर है। लेकिन सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र टाइगर सफारी थी। चिड़ियाघर के इंजार्च नरिंदर सिंह ने बताया कि टाइगर के जोड़े समेत अन्य जानवरों को लाने का प्रपोजल भेजा गया है। जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। रहता खतरा चिड़ियाघर में अलग-अलग प्रकार के जानवरों के बाड़े है। गीदड़ के बाड़े में आधे क्षेत्र में जाली लगी है। जबकि आधे में नहीं लगी है। जिससे घूमने आए लोगों के लिए खतरा रहता है। वहीं बाड़े में जो जानवरों के बोर्ड लगे हुए है। वह धुंधले हो गए है। जिसमें जानवरों के नाम और उनके बारे में स्पष्ट समझ में नहीं आता है। सफारी में पहले दो टाइगर होते थे। एक नर और एक मादा। नर टाइगर बीमार के होने कारण मादा टाइगर को यहां से शिफ्ट कर दिया गया। उसके बाद करीब एक साल तक नर टाइगर यहां रहा। पिछले साल दिसंबर में नर टाइगर की मौत हो गई। उसकी मौत के बाद टाइगर सफारी बंद है।

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