भास्कर न्यूज | कोरबा छत्तीसगढ़ राज्य बजट में कर्मचारियों के लिए घोषित कैशलेस चिकित्सा सुविधा को छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने स्वागत किया है। संगठन ने इसे कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए चिंता मुक्त स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और कोरबा जिलाध्यक्ष मनोज चौबे ने कहा कि पहले कर्मचारियों को इलाज के बाद बिल जमा करने और भुगतान की प्रक्रिया में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब कैशलेस सुविधा लागू होने से आपात स्थितियों में तत्काल इलाज उपलब्ध होगा और आर्थिक तनाव में भी कमी आएगी। एसोसिएशन ने हालांकि शिक्षकों से जुड़ी कुछ लंबित मांगों पर निराशा जताई। संजय शर्मा ने बताया कि संविलियन से पूर्व की सेवाओं को पेंशन योग्य मान्यता देने का मुद्दा अभी भी लंबित है। उन्होंने रमेश चंद्रवंशी एवं अन्य याचिकाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संविलियन से पूर्व दीर्घकालीन सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने सेवा की निरंतरता, कर्तव्यों की प्रकृति, वेतन का स्रोत और प्रशासनिक नियंत्रण के साथ संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के सिद्धांतों को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर बल दिया है। शिक्षक संगठन की मांग है कि संविलियन से पूर्व की सेवा अवधि को पेंशन गणना में शामिल किया जाए। मनोज चौबे ने कहा कि सरकार से इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा थी, लेकिन बजट में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं होने से शिक्षकों में निराशा है। इसके अलावा संगठन ने क्रमोन्नति और समयमान वेतनमान से जुड़ी मांगों पर भी चिंता जताई। “मोदी की गारंटी” के तहत क्रमोन्नति और समयमान के लिए निर्धारित 10 वर्ष की सेवा अवधि को वन टाइम रिलैक्सेशन के रूप में 5 वर्ष करने की अपेक्षा थी, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षकों को लाभ मिलता, लेकिन बजट में इस संबंध में कोई राहत नहीं दी गई। टीचर्स एसोसिएशन ने कहा कि बजट में स्वास्थ्य सुरक्षा की पहल स्वागत योग्य है, लेकिन संविलियन, क्रमोन्नति और समयमान जैसे लंबित मुद्दों पर जल्द कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि शिक्षकों की चिंता दूर हो और वे अपने काम पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें।


