लुधियाना शहर में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े केस बढ़ रहे हैं। ज्यादातर मामलों में माता-पिता समझ ही नहीं पाते कि उनके बच्चे बड़ों जैसा बर्ताव क्यों कर रहे हैं और वह इस वजह से कैसे खतरनाक कदम उठा सकते हैं। विशेषज्ञ इसे चाइल्डहुड साइकेट्रिक प्रॉब्लम्स की कैटेगरी में रखते हैं। इनमें डिप्रेशन, एंग्जायटी, ओवरथिंकिंग जैसे मामले शामिल हैं। ऐसे मामलों में लुधियाना के कुछ बच्चे आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने की कोशिश कर चुके हैं। शहर के क्लीनिक्स में ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं। इनमें एक बात कॉमन है कि जो माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पाते हैं, वे बच्चों की मानसिक स्थिति का अंदाजा भी नहीं लगा पाते। ऐसे मामलों का पता तब चलता है जब बच्चों की सेहत बिगड़ने लगती है। 14 साल की बच्ची हर परीक्षा के बाद मानसिक थकावट का शिकार हो जाती थी। उसे हमेशा इस बात का डर रहता था कि कहीं उसकी छोटी सी गलती से उसका रिजल्ट खराब न हो जाए। उसे परिणामों को लेकर इतना डर था कि वह रातभर सो नहीं पाती थी और परीक्षा खत्म होने के बाद भी किताबों में लगी रहती थी। परीक्षा में आए सवालों को बार-बार घर पर हल करती रहती थी। यह मानसिक दबाव उसे धीरे-धीरे उसे बीमार बनाता चला गया। जब तक पैरेंट्स को समझ में आया, तब तक केस काफी बिगड़ चुका था। लंबे इलाज के बाद उसकी रिकवरी हो पाई है। केस-1: 13 साल की बच्ची को लगा कि वह रिलेशनशिप के लिए फिट नहीं है ये मामला विशेषज्ञों के लिए भी हैरान करने वाला है। 13 साल की एक बच्ची को लगता है कि वह रिलेशनशिप के लिए फिट नहीं है। वह सोचती है कि वह पार्टनर की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाएगी। इस बात को लेकर वह लगातार सोचती रहती थी। फिर एक दिन उसने परेशान होकर फिनाइल पी ली। किस्मत से माता-पिता को इस घटना की जानकारी थोड़ी ही देर बाद मिल गई। वो उसे अस्पताल लेकर गए, जहां उसकी जान बच गई। बाद में उसकी काउंसिलिंग शुरू हुई। उसमें ये बात निकलकर आई कि वह भविष्य में होने वाली रिलेशनशिप को लेकर अभी से परेशान है। केस-2:16 साल की लड़की लुक्स को लेकर परेशान, इससे बेहद बीमार हो गई 16 साल की लड़की लुक्स को लेकर चिंतित रहती थी। वह बार-बार आइने में अपने शरीर और चेहरे को देखती रहती थी। अगर उसके शरीर को लेकर कोई कमेंट कर दें तो घंटों उसी बात पर विचार करती रहती थी। और तो और वह इसके लिए भी खुद को ही दोषी मानती थी। उसके फ्रेंड सर्किल में कोई सोशल मीडिया पर कुछ भी कमेंट करे तो उसे भी खुद से जोड़कर देखती थी। इस वजह से वह डिप्रेशन का शिकार हो गई। उसने अपनी परेशानी किसी को नहीं बताई, न ही घर में कोई उसकी हालात का अंदाजा लगा पाया। फिर हालत इतने बिगड़ गए कि वह बीमार रहने लगी।


