टीबी मरीजों की जांच करने के मामले में ​जांजगीर अव्वल

जिले ने टीबी के खिलाफ जंग में बड़ी कामयाबी हासिल की है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जांजगीर राज्य में पहले स्थान पर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पांच ब्लॉक के 49 हजार 710 लोगों की जांच की। टीम घर-घर जाकर सैंपल ले रही है। इसी मेहनत का नतीजा है कि जिले की 186 ग्राम पंचायतें अब टीबी मुक्त हो चुकी हैं। इस उपलब्धि पर जिले को राज्य स्तरीय सम्मान मिला है। रायपुर के अटल बिहारी बाजपेयी ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और आयुक्त सह संचालक प्रियंका शुक्ला ने जांजगीर को सम्मानित किया। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने और समय पर इलाज शुरू करने में मददगार साबित हो रही है। जिले की टीम ने लगातार मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया है। अब लक्ष्य है कि शेष पंचायतों को भी जल्द टीबी मुक्त किया जाए। विभाग की योजना है कि हर घर तक पहुंचकर जांच की जाए, ताकि कोई भी मरीज छूट न जाए। निक्षय निरामय अभियान चलाया गया: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत भारत को टीबी मुक्त करने के लिए निक्षय निरामय 100 दिवसीय अभियान चलाया गया था। इस अभियान के तहत जिले में सबसे ज्यादा लोगों की जांच की गई है। निक्षय निरामय अभियान के अंतर्गत राज्य में 36 लाख से अधिक हाई रिस्क व्यक्तियों की स्क्रीनिंग, 45 लाख एक्स-रे जांच और 1.5 लाख टीबी जांच उच्च तकनीक मशीनों से की गई है। इसकी वजह से जिले में बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं। वर्ष 2024 में 128 ग्राम पंचायतें हुईं टीबी मुक्त राज्य में 4103 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। यह उपलब्धि ग्राम पंचायतों के जन प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य कर्मियों और नागरिकों की सहभागिता से हुई है। वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में वर्ष 2023 में 58 और वर्ष 2024 में 128 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं।

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