भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा जिले में टेक्सटाइल प्रोसेस इकाइयों से निकलने वाले दूषित जल की समस्या के समाधान को लेकर प्रशासन ने प्रभावी पहल की है। जिला प्रशासन ने प्रदूषण की रोकथाम और पर्यावरण संरक्षण के लिए उपखंड स्तर पर विशेष जांच समितियों का गठन किया है। जिसमें पहली बार सीओ स्तर के पुलिस अधिकारी को भी शामिल किया है। यह कार्रवाई राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की अनुशंसा के बाद की गई है। समितियां भीलवाड़ा, मांडल, गुलाबपुरा और हमीरगढ़ उपखंड क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य करेंगी। इन समितियों में एसडीएम को अध्यक्ष बनाया है, जबकि पुलिस, उद्योग विभाग, रीको और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रतिनिधियों को सदस्य के रूप में शामिल किया है। गठित समितियां समय-समय पर औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण करेंगी। क्षेत्रवासियों से प्राप्त शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगी। जांच रिपोर्ट सीधे कलक्टर को पेश की जाएगी, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहेगी। विदित है कि चितौडग़ढ़ रोड व अजमेर रोड पर स्थित प्रोसेस हाउस संचालकों की ओर से चोरी चुपके लगातार दूषित पानी छोड़ने के मुद्दे को दैनिक भास्कर ने गत 6 फरवरी को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद कलेक्टर ने एसडीएम के नेतृत्व में कमेटियों का गठन किया। सांसद दामोदर अग्रवाल की अध्यक्षता में अक्टूबर में हुई दिशा की मीटिंग के बाद विधायकों ने दूषित पानी का मुद्दा उठाया था। मीटिंग में विधायक अशोक कोठारी, लादूलाल पितलिया, जब्बरसिंह सांखला, उदय लाल भडाणा, कलक्टर जसमीत सिंह संघू, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक घनेटवाल सहित कृषि व जलदाय विभाग के अधिकारी शामिल थे। बैठक में तय हुआ था कि किसी भी प्रोसेस हाउस की ओर से केमिकलयुक्त पानी छोड़े जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। विधायकों ने आरोप लगाया था कि प्रोसेस हाउस संचालक न केवल नालों में केमिकलयुक्त पानी डाल रहे हैं बल्कि इसे बोरवेलों में भी डाला जा रहा है। आरपीसीबी की टीम को भी रात के समय किए गए औचक निरीक्षण में दूषित पानी टैंकरों के माध्यम से छोड़ने के सबूत मिले थे। मांडल विधायक भडाणा विधानसभा में उठा चुके हैं मुद्दा मांडल विधायक उदयलाल भडाणा ने प्रोसेस हाउसों से निकलने वाले दूषित पानी को लेकर विधानसभा में मुद्दा उठाया था। भडाणा ने आरोप लगाया कि दूषित पानी छोड़ने से किसानों की उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है। वन मंत्री संजय शर्मा ने जवाब में कहा कि राजस्थान में इस व्यवसाय से जुड़े उद्योग बरसात की आड़ में पानी छोड़ते है। इनके खिलाफ विभाग समय-समय पर कार्रवाई कर रहा है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल सभी कपडा उद्योगों को जीरो डिस्चार्ज की शर्त पर ही उद्योग चलाने की अनुमति देता है।


