टेट की जबरन शर्त लागू करने के फैसले के खिलाफ संघर्षशील अध्यापक संगठनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में अध्यापक एकत्र होकर हलका भदौड़ के विधायक की रिहायश के बाहर रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विधायक के पीए के माध्यम से सीएम के नाम रोष पत्र सौंपते मांग की कि अध्यापकों के भविष्य की सुरक्षा के लिए पंजाब विधानसभा में तुरंत बिल या प्रस्ताव पास किया जाए तथा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर की जाए। अध्यापक नेताओं राजीव कुमार, हरिंदर मल्लियां, परमिंदर बरनाला, यशपाल तपा और जसवीर बीहला ने बताया कि 01.09.2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एनसीटीई के नोटिफिकेशन को नजरअंदाज करते सभी अध्यापकों पर टेट की शर्त लागू कर दी गई है। ये फैसला इन-सर्विस अध्यापकों के लिए गैर-वाजिब और गैर-संवैधानिक है, जिससे पदोन्नतियां रुक गई हैं और सेवा सुरक्षा पर संकट खड़ा हो गया। नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने इस मामले में न तो सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की है और न ही विधानसभा में बिल लाकर अध्यापकों को राहत दी है। 2017 के पत्र के अनुसार कुछ श्रेणियों को पदोन्नति के समय टीईटी से छूट दी गई थी, लेकिन अब वह पत्र भी वापस ले लिया गया, जिससे अध्यापकों में भारी रोष है। इससे पहले 22 फरवरी को शिक्षा मंत्री के हलके श्री आनंदपुर साहिब में विशाल प्रदर्शन किया था और 27 फरवरी को पंजाब भवन चंडीगढ़ में बैठक तय हुई थी, जिसे स्थगित कर दिया गया। इसके चलते अध्यापक संगठनों ने कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों की रिहायश के आगे प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। अध्यापकों ने मांग की कि टेट लागू होने से पहले नियुक्त अध्यापकों की तुरंत पदोन्नतियां की जाएं, 8 मार्च को लिया जा रहा जबरन टीईटी रद्द किया जाए तथा 15 मार्च को प्रारंभिक नियुक्ति के लिए लगाया जा रहा टीईटी भी इन-सर्विस अध्यापकों पर लागू न किया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 का भी विरोध करते कहा कि इससे शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है और अध्यापकों की सेवा सुरक्षा कमजोर हो रही है। प्रदर्शन के दौरान टीईटी की जबरन शर्त के खिलाफ संघर्ष तेज करने का एलान किया। इस मौके पर विभिन्न अध्यापक नेता और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।


