ट्रॉमा अग्निकांड:30 मिनट की चूक से 6 मौतें; चाबी नहीं मिली तो स्टाफ ड्यूटी छोड़ भागा, रिपोर्ट में 9 जिम्मेदार और कार्रवाई सिर्फ दो पर ही

एसएमएस ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में 5 अक्टूबर 2025 की रात लगी लापरवाही की चिंगारी आज भी दहक रही हैं। उस रात आईसीयू में धुआं पहले आया, आग बाद में, लेकिन सिस्टम पहले ही दम तोड़ चुका था। परिजन चिंगारी देख स्टोर का ताला खुलवाने स्टाफ के पास दौड़े पर उन्हें चाबी ही नहीं मिली। किसी ने धुआं उठने और बदबू का कारण जानने तक की कोशिश नहीं की। दमकल विभाग या अन्य किसी को सूचना तक नहीं दी। यह सब हाईलेवल कमेटी की 31 पेज की जांच रिपोर्ट कह रही है। रिपोर्ट के अनुसार रात 11:30 बजे धुएं की शिकायत मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई, स्टोर का ताला नहीं खुल पाया। आग शॉर्ट-सर्किट से लगी, लेकिन छह मरीजों की मौत दम घुटने से हुई। रिपोर्ट ने नौ स्तरों पर जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम दर्ज किए हैं। यह भी कहा गया है कि चौंकाने वाली बात तो यह है कि कमेटी को यह रिपोर्ट 7 दिन में देनी थी, लेकिन सामने 142 दिन बाद आई है। हालांकि कमेटी का कहना है कि उन्होंने नवंबर 2025 में ही सौंप दी थी। इधर, रिपोर्ट सामने आते ही चिकित्सा विभाग ने एसएमएस प्रिंसिपल को जिम्मेदारों पर कार्रवाई के आदेश दे दिए। डॉ. सुशील भाटी और डॉ. अनुराग धाकड़ को 16 सीसीए का नोटिस दिया गया है। इंजीनियर गोपाल कृष्ण को सस्पेंड और नर्सिंगकर्मी योगेश को नौकरी से हटाया जा रहा है। परिजनों ने धुएं व बदबू की शिकायत की, मगर स्टाफ ने अनसुना किया रिपोर्ट के अनुसार घटना का आधे घंटे पहले (11:30 बजे) ही पता चल गया था। परिजनों ने धुआं और बदबू की शिकायत की थी। वार्ड बॉय स्टोर तक गया, लेकिन ताला देख चला गया। स्टाफ को चाबी ही नहीं मिली। धीरे-धीरे धुआं आईसीयू में फैल गया। यह देखकर उदयसिंह काले रंग का बैग लेकर आईसीयू से बाहर चला गया। नर्सिंगकर्मी योगेश भी आईसीयू से भागते हुए सीसीटीवी में नजर आया। परिजन मरीजों को बाहर निकालने के लिए जूझते दिखे, एक तो मरीज को घसीटकर बाहर ले गए। परिजनों और पुलिस ने अन्य स्टाफ की मदद से गंभीर मरीजों को बाहर निकाला, तब तक घुटन से 6 की मौत हो गई। दैनिक भास्कर ने 6 अक्टूबर को छपी खबर में बता दिया था कि मरीज व परिजनों ने स्टाफ से धुआं-चिंगारी की शिकायत की थी, मगर अनसुना कर दिया। इन्हें माना है कमेटी ने 6 मौतों का जिम्मेदार फायर डिटेक्शन एवं फायर फाइटिंग : फायर डिटेक्शन सही नहीं हुआ। फायर फाइटिंग का कार्य भी नहीं हुआ। आईसीयू वास्तुकार : सिर्फ एक ही जटिल रास्ता था, जिसके मरीज फंस गए। आईसीयू में बेड्स के बीच गैप कम

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *