देशभक्ति और जनसेवा की शपथ लेकर खाकी पहनने वालों से आम जनता का भरोसा डगमगा रहा है। पुलिस न फरियाद सुन रही है और न ही एफआईआर दर्ज कर रही है। यह हकीकत किसी और ने नहीं, बल्कि खुद सीएम हेल्पलाइन के सरकारी रिकॉर्ड ने बयां की है। नए साल के शुरुआती 46 दिनों (1 जनवरी से 15 फरवरी 2026) के भीतर संभाग के जिलों से सैकड़ों शिकायतें सीधे सीएम हेल्पलाइन 181 पर दर्ज हुईं। सबसे ज्यादा 1,003 शिकायतें ग्वालियर जिले से सामने आईं, जबकि भिंड में 782, मुरैना में 532, शिवपुरी में 572, गुना में 454, दतिया में 296, अशोकनगर में 164 और श्योपुर में 137 लोगों ने पुलिस के खिलाफ शिकायत की। यदि प्रदेश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अवधि में 24,128 शिकायतें पुलिस के खिलाफ दर्ज हुईं। लोगों का कहना है कि पुलिस दबाव या पक्षपात में निष्पक्ष जांच नहीं करती। एफआईआर नहीं लिखती। लोगों ने तो पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खराब व्यवहार, बेवजह परेशान करने और मारपीट तक के आरोप लगाए हैं। गुस्से की वजह… शिकायत से जांच तक में लापरवाही 4 उदाहरण से समझें… सिस्टम की नाकामी पुलिस को आम इंसान की पीड़ा महसूस करनी चाहिए
हमारी जिम्मेदारी सिर्फ कानून लागू करना नहीं, बल्कि एक आम इंसान की पीड़ा को महसूस करना भी है। अगर पुलिस हर व्यक्ति के दर्द, उसकी मजबूरी और उसकी उम्मीद को समझे तो शिकायतों की संख्या अपने आप कम हो जाएगी। सीएम हेल्पलाइन पर लोगों ने पुलिस के बारे में जो भी शिकायतें दर्ज कराई हैं, हम उन्हें केवल कागजी प्रक्रिया नहीं मानते। हम हर शिकायत की जांच कर निराकरण कराने का प्रयास करेंगे, ताकि जनता का विश्वास मजबूत हो।
-अरविंद सक्सेना, आईजी ग्वालियर


