पंजाब के मानसा में किसान नेता रुलदू सिंह मानसा ने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन पर सवाल खडे़ किए हैं। उन्होंने कहा कि डल्लेवाल और पंधेर की आपस में कोई सहमति नहीं है। क्योंकि एक मरणव्रत पर बैठा है तो दूसरा जत्थे बन कर रवाना कर रहा है। वह अगर हमारी हिमायत चाहते हैं तो डलेवाल मरण व्रत छोड़कर हमारे जत्थेबंदियों से आकर मीटिंग करें। फिर हम सोचेंगे कि आंदोलन कैसे लड़ना है। किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन और डल्लेवाल के मरण व्रत को लेकर किसान नेता रुलदू सिंह मानसा ने कहा कि जब संयुक्त किसान मोर्चे द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ 2020 में आंदोलन लड़ा गया था तो उससे पहले किसान नेताओं द्वारा सड़क, रेलवे लाइन, मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर मार्च निकालकर किसानों को जागरूक किया था। फिर दिल्ली की ओर किसान रवाना हुए थे। लेकिन यह दो गुट अलग हो गए थे। बहुत सी मांगे राज्य सरकारों को पूरी करनी हैं : रुलदु सिंह उन्होंने कहा कि मेरे ख्याल से यह आंदोलन केंद्र सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि राज्य सरकारों के खिलाफ करना चाहिए, क्योंकि बहुत सी ऐसी मांगे हैं जो राज्य सरकारों को पूरी करनी हैं। उन्होंने कहा कि डल्लेवाल और पंधेर की कोई आपसी में सहमति नहीं है। उन्होंने कहा कि डल्लेवाल मरण व्रत पर बैठ गया है और पंधेर जत्थे रवाना कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर डल्लेवाल हमारी सहमति चाहते हैं तो अपना मरण व्रत छोड़कर हमसे आकर मीटिंग करें, फिर हम सोचेंगे कि आंदोलन को कैसे लड़े। रुलदू सिंह ने कहा कि यह आंदोलन गलत शुरू किया है। यह आंदोलन ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि डल्लेवाल का यह पहला मरण व्रत नहीं है, इससे पहले भी वह पांच बार व्रत रख चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब आंदोलन फंस चुका है।


