भास्कर न्यूज| धौलपुर तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में फैली चंबल में मगरमच्छ, डॉल्फन, इंडियन स्कीमर सहित जलीय एवं तटों पर पाने वाले पक्षियों की गणना की जा रही है। राष्ट्रीय डेटा तैयार करने के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग हर साल फरवरी में एक पखवाड़े तक गणना करता है। इसमें धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व भी जोड़ा गया है। करौली बॉर्डर से राजाखेड़ा होते हुए उत्तरप्रदेश बॉर्डर तक गणना में शामिल होगा। इस दौरान तीन राज्यों के जलीय जीव विशेषज्ञ नदी में 500 किमी तक सर्चिंग कर प्रमुख रुप से घडिय़ालों के घोंसलों को बचाने के लिए भी काम करेंगे। पांच फरवरी से विशेषज्ञों ने चंबल में गणना शुरू कर दी है। इस दौरान चंबल में कई जगह चट्टानी इलाका होने से गणनाकर्मी कई किमी पैदल सर्वे करेंगे। नदी में पानी के बहाव की जानकारी जुटाई जाएगी तथा उसकी गुणवत्ता के नमूने लेकर सरकार को भेजे जाएंगे। सर्वे की शुरूआत चंबल नदी से मिलने वाली पार्वती नदी से हुई। जिससे जलीय जीवों की संख्या पता चलेगी। परिंदों की तरह घड़ियाल भी अंडे देने के लिए घोंसला बनाते हैं। इसके लिए वह नदी के किनारे रेत में गहरा गड्डा खोदते हैं। खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों से घड़ियालों के घोंसलों को हमेशा खतरा बना रहता है। नदी में बाढ़ आने पर भी घोंसले नष्ट हो जाते हैं। इसलिए घड़ियालों की नए सिरे से गणना के साथ उनके घोंसलों को चिह्नित कर उनकी रक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत चंबल में व्यापक शोध और निगरानी कार्य हो रहा है। विशेषज्ञ चंबल सेंचुरी में जगह-जगह हवा का तापमान, पानी का तापमान नापेंगे. इसके अलावा इंडेप्थ साउंड मीटर से जलीय जीवों की मौजूदगी वाली जगहों पर नदी की गहराई, फ्लो मीटर से पानी के बहाव की गति, रेंज फाउंडर से नदी की विभिन्न जगहों पर चौड़ाई नापी जाएगी। घडियाल केयर टेकर ज्योति दंडौतिया ने बताया कि 20 फरवरी तक चलेगी। ^तीन राज्यों में फैली चंबल में एक्सपर्ट टीमों के साथ जलीय जीवों की गणना 5 फरवरी से शुरू हो गई है।जो राष्ट्रीय डाटा बनेगा कि कितने जलीय जीव हैं इनकी संख्या चंबल में बढ़ रही है या घट रही । -डॉ आशीष व्यास, डीसीएफ, डीकेटीआर।


