डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते खतरे:डार्क वेब पर भारतीयों का डेटा, विशेषज्ञ बोले- सावधानी ही सुरक्षा

डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को हनुमानगढ़ टाउन स्थित नेहरू मेमोरियल विधि कॉलेज में साइबर विधि एवं जागरूकता विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का द्वितीय सत्र आयोजित किया गया। इसमें बैंकिंग प्रणाली और साइबर हमलों से बचाव पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसबीआई रावतसर शाखा प्रबंधक सुनील स्वामी ने बताया कि भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है, लेकिन साइबर सुरक्षा अवसंरचना अभी भी चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारतीयों की निजी जानकारी, जैसे नाम, मोबाइल नंबर, आधार और पासपोर्ट विवरण, डार्क वेब पर उपलब्ध पाए गए हैं। स्वामी ने लोगों को ओटीपी, पासवर्ड और बैंक विवरण किसी से भी साझा न करने की सलाह दी। यूको बैंक टाउन शाखा प्रबंधक संदीप कुमार ने जानकारी दी कि भारतीय रिजर्व बैंक बैंकिंग प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार नए सुरक्षा मानक लागू कर रहा है। उन्होंने मजबूत पासवर्ड बनाने, नियमित रूप से पासवर्ड बदलने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सीताराम ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सुरक्षित साइबरस्पेस का निर्माण एक सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. ब्रजेश अग्रवाल ने हाल ही में हुए साइबर धोखाधड़ी के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को जागरूक रहने का संदेश दिया। इस प्रशिक्षण सत्र में शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल सुविधाओं का लाभ तभी सुरक्षित है, जब उपयोगकर्ता पूरी तरह सतर्क और जागरूक रहें।

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