राज्य सरकार द्वारा बजट घोषणा के तहत भदराई से जीवाणियों की ढाणी होते हुए सावा मेगा हाइवे तक स्वीकृत 29 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य पिछले एक साल से अधर में लटका हुआ है। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा निर्माण की सभी तकनीकी तैयारियां पूरी किए जाने और 30 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होने के बावजूद डिस्कॉम की ओर से उपयोगिता स्थानांतरण के लिए सहमति नहीं मिल पा रही है। यह सड़क नहर के डॉवल से 1.50 मीटर की दूरी छोड़कर प्रस्तावित है। पीडब्ल्यूडी द्वारा किए गए सर्वे में सड़क सीमा के भीतर कुल 181 बिजली पोल पाए गए हैं, जिन्हें शिफ्ट किया जाना अनिवार्य है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी ने डिस्कॉम को कई बार पत्र लिखकर कम से कम लागत का एस्टीमेट तैयार कर सहमति देने की मांग की है। विभाग ने यह भी लिखा हैं कि शिफ्टिंग के दौरान मौके पर मौजूद पुरानी सामग्री का ही उपयोग किया जाए ताकि राजकीय कोष पर अनावश्यक भार न पड़े। डिस्कॉम की उदासीनता के कारण बिजली पोल की शिफ्टिंग का कार्य शुरू हो पाया। पीडब्ल्यूडी सर्वे में 181 बिजली के पोल होंगे शिफ्ट नर्मदा नहर परियोजना की एनओसी के अनुसार नहर के डॉवल से 1.50 मीटर छोड़कर सड़क बननी है। पीडब्ल्यूडी ने सर्वे कर उन 181 पोलों की मार्किंग भी कर दी है जो सड़क सीमा में आ रहे हैं।पीडब्ल्यूडी ने डिस्कॉम को स्पष्ट लिखा है कि वे पुराने सामान पोल और कंडक्टर का ही उपयोग कर कम से कम लागत का एस्टीमेट भेजें ताकि सरकारी पैसे की बर्बादी न हो, लेकिन डिस्कॉम की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।पीडब्ल्यूडी ने पत्र में साफ किया है कि शिफ्टिंग के लिए नए लेटिस पोल जैसे महंगे आइटम न जोड़ें बल्कि मौके पर मौजूद सामान को ही शिफ्ट करें। “हमने 181 पोलों की मार्किंग कर डिस्कॉम को कई बार पत्र लिखे हैं। उन्हें कम लागत का एस्टीमेट और एनओसी देने को कहा है ताकि टेंडर प्रक्रिया शुरू हो सके। डिस्कॉम की ओर से सहमति मिलते ही काम गति पकड़ेगा।” – सुराराम, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी “इस संबंध में अभी तक मेरे पास कोई फाइल नहीं आई है। मैं अभी कार्यालय में इस संबंध में पता करता हूं। जल्द ही इस यूटिलिटी शिफ्टिंग की फाइल को पास कर देंगे।” – एन.के. जोशी, चीफ इंजीनियर, डिस्कॉम


